वित्त विभाग के लेखानुदान के निर्देश जारी करने के बाद भी प्रदेश के करीब 70 हजार शिक्षकों को मार्च का वेतन नहीं मिल पाया है। अशासकीय शिक्षक भी तीन महीने से वेतन का इंतजार कर रहे हैं। जबकि सरकार ने उन्हें आश्वस्त किया था कि उन्हें महीने की 10 तारीख को वेतन जारी हो जाएगा।
सरकार के पास बजट उपलब्ध होने के बावजूद अभी भी कुछ विभाग अपने कर्मचारियों को वेतन जारी नहीं कर पाए हैं। इनमें सबसे अधिक कर्मचारी संख्या वाला शिक्षा विभाग भी शामिल है। जबकि वित्त विभाग चार अप्रैल को लेखानुदान की स्वीकृति को लेकर विभागों को निर्देश जारी कर दिए थे। उधर, प्रदेश के अशासकीय स्कूलों के शिक्षकों को वेतन मिलने की तारीख मिली पर पिछले तीन महीने से वेतन नहीं मिला।
शिक्षक अपनी इस समय को लेकर हाल ही में शिक्षा मंत्री डॉ.धन सिंह रावत से मिले। जिसके बाद विभाग की ओर से हर महीने की 10 तारीख को वेतन देने का निर्देश हुआ, लेकिन उन्हें अब तक वेतन नहीं मिला। शिक्षकों का कहना है कि इस साल फरवरी से उन्हें अब तक वेतन नहीं मिला।
शिक्षकों के मुताबिक समस्या को लेकर आठ अप्रैल को शिक्षक शिक्षा मंत्री से मिले। जिसके बाद विभाग की ओर से समस्त मुख्य शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी किया गया कि अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाचार्यो, प्रबंधकों के साथ आवश्यक समन्वय स्थापित करते हुए, शिक्षकों एवं कर्मचारियों को हर महीने की 10 तारीख तक वेतन दिया जाना तय किया जाए।
इस संबंध में वित्त एवं लेखाधिकारी द्वारा नियमित समीक्षा करते हुए जिस स्तर पर भी इसमें देरी हो रही हो, उसके जल्द निस्तारण की कार्यवाही की जाए, लेकिन विभाग के इस निर्देश के बावजूद इन स्कूलों के शिक्षकों एवं कर्मचारियों को अब तक वेतन नहीं मिला। उत्तराखंड माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष डा.अनिल शर्मा के मुताबिक समय पर वेतन न मिलने से शिक्षकों एवं कर्मचारियों को असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। जो अपने आवास और अन्य ऋण की अदायगी नहीं कर पा रहे हैं।
प्रदेश के अशासकीय स्कूलों के शिक्षकों को अब तय समय पर वेतन मिलेगा। इसके लिए हर महीने की दस तारीख तय की है। उनके साथ किसी तरह का भेदभाव नहीं किया जाएगा।
-डा.धन सिंह रावत, शिक्षा मंत्री
अशासकीय स्कूलों के साथ ही सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को अभी वेतन नहीं मिल पाया है। प्रयास किया जा रहा है कि एक सप्ताह के भीतर सभी शिक्षकों का वेतन जारी कर दिया जाए।
-आरके कुंवर, शिक्षा निदेशक