कोलकाता की एक कंपनी ने विभिन्न बैंकों से करोड़ों रुपये लोन लेकर 16 वाल्वो बसें खरीदी। इसके बाद बैंकों की फर्जी एनओसी लगाकर बसों को उत्तराखंड परिवहन निगम में पंजीकृत करवा दिया। फिर करार के तहत बसों को परिवहन निगम के नाम ट्रांसफर करवा दिया गया।
बैंकों के आडिट में जब इसका खुलासा हुआ। मामले की जांच पश्चिम बंगाल सरकार ने सीबीआई को सौंपी है। इस संबंध में बृहस्पतिवार को सीबीआई का एक पत्र आरटीओ कार्यालय पहुंचा। संभावना जताई जा रही है कि जल्द ही सीबीआई की टीम जांच के लिए दून पहुंचेगी।
सितंबर में ली गई थीं बसें
सितंबर 2011 में कोलकाता की लॉजिस्टिक कंपनी ने विभिन्न राष्ट्रीय बैंकों से लोन लेकर 16 वाल्वो बसें खरीदीं। इसके बाद बैंकों की फर्जी एनओसी के जरिए इसे उत्तराखंड परिवहन निगम के बेड़े में शामिल कर दिया।
पिछले कई सालों से यह बसें उत्तराखंड परिवहन निगम में शामिल हैं और विभिन्न स्थानों के लिए संचालित हो रही हैं, लेकिन न तो बैंक अधिकारियों को इसकी भनक लगी और न ही परिवहन निगम अधिकारियों ने इसकी सुध ली।
सालाना ऑडिट में हुआ खुलासा
इससे पहले मार्च 2012 में बैंकों के सालाना आडिट में मामले का खुलासा हुआ था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो सकी। थक हारकर बैंकों ने पश्चिम बंगाल की सरकार से गुहार लगाई। जिसके बाद पश्चिम बंगाल सरकार ने सीबीआई को जांच सौंपी।
बृहस्पतिवार को सीबीआई का पत्र आरटीओ कार्यालय देहरादून पहुंचा, जिसमें सभी 16 वाल्वों बसों की फाइलों के संबंध में जानकारी मांगी गई है।
इसलिए किया गया होगा घपला...
उत्तराखंड परिवहन निगम के सूत्रों के अनुसार, निगम के साथ करार की शर्त है कि बसों पर कोई लोन नहीं होना चाहिए। क्योंकि लोन पर खरीदे गए किसी वाहन को बिना बैंक की आज्ञा से ट्रांसफर नहीं किया जा सकता। इसलिए बस कंपनी ने ये घपला किया और फर्जी दस्तावेजों के जरिये राज्य में बसों का पंजीकरण कराया।