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‘जाना तो था ही, चाहे डोली में जाऊं या अर्थी में’

Fri, 05 Jun 2015 11:47 AM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, कीर्तिनगर (टिहरी)
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‘मेरी मां और भाइयों को परेशान न किया जाए। मैं स्वेच्छा से आत्महत्या कर रही हूं। मेरे पेपर ठीक नहीं हुए हैं। 12 जून को मेरी शादी होनी थी। चाहे डोली में जाऊं या अर्थी में, जाना तो मुझे था ही।’ यह लिखकर 22 वर्षीय युवती ने फांसी लगाकर जान दे दी। युवती ने हाल में ही केंद्रीय गढ़वाल विश्वविद्यालय से बीए अंतिम वर्ष की परीक्षा दी थी।
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यह घटना उत्तराखंड में टिहरी के कीर्तिनगर क्षेत्र के मुंडोली (बगीचा) गांव की है। 22 वर्षीय ज्योति पुत्री स्व. पृथ्वी सिंह रावत ने बुधवार रात कमरे में ही पलंग की रस्सी का फंदा बनाकर आत्महत्या कर ली। गुरुवार सुबह ज्योति की मां उसके कमरे में गई। कमरा अंदर से बंद नहीं था।

अंदर जाते ही मां के पैरों तले जमीन खिसक गई। ज्योति पंखे से लटकी हुई थी। उन्होंने पड़ोसियों को घटना की जानकारी दी। ग्रामीणों की सूचना पर कोतवाल कीर्तिनगर एएस रावत मौके पर पहुंचे।
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कोतवाल ने बताया कि मौके से एक सुसाइड नोट मिला है। उसमें आत्महत्या का कारण परीक्षा ठीक नहीं होने की बात कही गई है। उन्होंने बताया कि 12-13 जून को युवती की शादी होने वाली थी। पिता का देहांत आठ साल पहले हो चुका है। मां नौकरी कर रही हैं। ग्रामीणों ने बताया कि युवती पहले कभी फेल नहीं हुई थी।

डोली पर चढ़कर लगाई फांसी
ज्योति को नौ दिन बाद जिस डोली में बैठकर ससुराल के लिए विदा होना था। उसी डोली के ऊपर चढ़कर उसने फांसी लगाई। घर में शादी की तैयारी चल रही थी। कार्ड बंट चुके थे। शादी की खरीदारी भी हो चुकी थी।
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