उत्तराखंड आपदा के बाद नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथार्टी (एनडीएमए) के सदस्य वीके दुग्गल का कहना है कि माउंटेन डिजास्टर पर पूर्वानुमान देना अभी मौसम विभाग के लिए बड़ा कठिन है।
ऊंची-नीची पहाड़ियों और प्रतिकूल मौसम के चलते आंकलन लगाना बहुत मुश्किल होता है। यही कारण है कि उत्तराखंड आपदा पर मौसम विभाग की सटीक जानकारी नहीं आ सकी।
उत्तराखंड आपदा पर केंद्र और राज्य के बीच समन्वय बनाने को केंद्र से नियुक्त हुए एनडीएमए सदस्य वी.के. दुग्गल साढ़े चार महीने उत्तराखंड में बिताने के बाद बृहस्पतिवार को यहां से रिलीव हो गए।
कंपोजिट प्लान तैयार होगा
सचिवालय में गुरुवार को पत्रकारों से बातचीत में दुग्गल ने कहा कि माउंटेन डिजास्टर को लेकर एनडीएमए और केंद्र सरकार एक कंपोजिट प्लान तैयार कर रहा है। ताकि सिस्टम को और बेहतर बनाया जा सके। उन्होंने बताया कि उड़ीसा में आए फैलिन के संबंध में एनडीएमए को साढ़े चार दिन पहले मौसम विभाग ने सटीक जानकारी दे दी थी।
यहां तक बता दिया था कि कितनी रफ्तार से हवा चल रही है और कहां उसका प्रभाव पड़ेगा। इतने पहले इतनी सटीक जानकारी मिलने से ही लाखों लोगों को सुरक्षित स्थान पर भेजने का मौका मिल गया। जबकि उत्तराखंड में आई आपदा में मौसम विभाग की इतनी सटीक जानकारी नहीं थी।
सरकार समेत सभी ने बेहतर कार्य किया
आपदा प्रबंधन, राहत और बचाव कार्यों पर सरकार की सराहना करते हुए दुग्गल ने कहा कि जो हालात थे, उसमें सरकार समेत सभी ने बेहतर कार्य किया है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड आपदा ने माउंटेन डिजास्टर पर अब सभी का फोकस किया है। इस राज्य में विभिन्न तरह के डिजास्टर हैं।
कभी भूकंप है तो कभी बाढ़ और कभी अतिवृष्टि से आपदाएं होती रहती हैं। यह स्थिति पूरे हिमालयन राज्यों की है। इसके मद्देनजर एनडीएमए कंपोजिट प्लान तैयार कर रहा है। अर्ली वार्निंग सिस्टम के साथ ही पूरे डिजास्टर सिस्टम को बेहतर करने की कोशिश शुरू हो गई है।