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ग्रामीणों के सामने उत्तराखंड का आपदा प्रबंधन फिर फेल

Mon, 04 Jul 2016 04:36 PM IST
मुकेश जुयाल / अमर उजाला, विकासनगर
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eight killed in road accident in chakrata - फोटो : amar ujala
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समरजैंस मोटर मार्ग पर हुए दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर प्रदेश के आपदा प्रबंधन की पोल खोलकर रख दी। प्रशासन के आपदा प्रबंधन के दावे धरे के धरे रह गए। रेस्क्यू चलाना तो दूर प्रशासन घटना की जानकारी लगने के कई घंटे बाद भी घटना स्थल नहीं पहुंचा। ग्रामीणों ने अंधेरे में जान जोखिम में डाल कर पांच घंटे तक रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर सभी मृतकों और घायलों को खाई से बाहर निकाला।
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यूटिलिटी खाई में गिरने की सूचना आसपास के गांव के लोगों को रात करीब दस बजे लगी। खबर लगते ही खुन्ना गांव के साथ ही खुन्ना-अलमान, बिसोई, क्यारी, कांडोई, उभऊ गांव के लोग राहत और बचाव कार्य के लिए घटना स्थल की ओर दौड़ पड़े। रात में बूंदाबांदी और घने कोहरे के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन चलाने में भारी परेशानी हुई। लेकिन, ग्रामीणों ने प्रशासन का मुंह ताकने के बजाय निजी संसाधनों से ही रेस्क्यू ऑपरेशन की शुरुआत की।

एक-एक कर ग्रामीण खड़ी ढलान से नीचे उतरने लगे। इस बीच रुक-रुककर भूस्खलन भी जारी था। मलबा और पत्थर नीचे बचाव कार्य में जुटे ग्रामीणों की ओर गिर गए रहे, लेकिन ग्रामीणों ने हिम्मत नहीं हारी। ग्रामीण हाथों में जोक्टी (मशाल) और टार्च लेकर खाई में उतरे। जहां तहां शव बिखरे पड़े थे।
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घायलों की कराह से पूरी घाटी में दर्द घुला हुआ था। महज बांस के डंडों के सहारे ग्रामीणों ने शवों को सड़क तक पहुंचाया। घायलों को कंधों पर लादकर किसी तरह बाहर निकाला। रात 10 बजे से शुरू हुआ बचाव कार्य तीन बजे तक चला। इसके बाद तक प्रशासन का कोई नुमाइंदा मौके पर नहीं पहुंच सका था।
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खस्ताहाल सड़क ने लील ली आठ जिंदगी

accident in chakrata - फोटो : amar ujala
आखिरकार जिसका डर था वही हुआ। खस्ताहाल समरजैंस मोटर मार्ग ने शनिवार को सड़क हादसे में आठ मासूमों की जान ले ली। यदि समय रहते मार्ग की मरम्मत करा ली जाती तो इस सड़क हादसे को टाला जा सकता था।

बीते 04 जून को अमर उजाला ने सड़क की खस्ताहालत पर 'समरजैंस मार्ग पर डेंजर प्वाइंट हैं बरकार, राहगीरों को करना पड़ेगा खतरों का सफर' शीर्षक से खबर को प्रमुखता को प्रकाशित किया था। तब विभागीय अधिकारियों ने बरसात से पूर्व सड़क की मरम्मत कराने की बात कही थी। लेकिन, फिर किया कुछ नहीं।

जिस जगह पर हादसा हुआ वहां पर भी सड़क की हालत बेहद खराब है। अमर उजाला ने साफ चेताया था कि ट्रीटमेंट के अभाव में सड़क की जमीन कई जगहों पर लगातार धंसती जा रही है। बावजूद विभाग ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया। शनिवार की शाम को भी हादसे वाली जगह पुश्ता ढहने से यूटिलिटी खाई में समा गई।

स्थानीय गुमान सिंह तोमर, कृपा राम नौटियाल, जगत सिंह तोमर, रणवीर तोमर का कहना है कि सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढे हैं, कई जगहों पर मलबे के ढेर लगे हुए हैं। सड़क पर न तो पैराफिट हैं, न ही भूस्खलन को रोकने के लिए सुरक्षा दीवारें। मरम्मत के अभाव में सड़क पर आधा दर्जन से अधिक डेंजर प्वाइंट बन गए हैं। उन्होंने कहा कि पिछले साल की बरसात में सड़क को खासा नुकसान पहुंचा है। विभाग से मरम्मत की मांग की गई थी। लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। 

यहां है डेंजर प्वाइंट
मरम्मत के अभाव में सैगाईखड्ड, मांजढुंग, चंतरागाड़, कांडोईखड्ड, रखताड़खड्ड, सीला गांव के पास, बाडोखड्ड, डाबरा गांव पर डेंजर प्वाइंटस बन गए हैं। 

सड़क से जुड़े गांव
40 किमी लंबी इस सड़क से मुंशीगांव, लुहारना, सरियारना, लुधेरा, कांडोई, खुन्ना, मैसासा, रखताड़, चिचराड़, रामपुर, गडोल, मुंधान, डाबरा, गांगरऊ, खाती, भुनऊ, कछटा, खुशिऊ, आस्टा, चिताड़ समेत तीन दर्जन गांव जुड़े हैं। 

सड़क की मरम्मत के लिए बजट स्वीकृत है। वर्तमान में सड़क पर काम भी चल रहा है। ठेकेदार को काम में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं।
- मुकेश परमार, ईई लोनिवि साहिया

Published By : Nirmala Suyal
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