दून विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. मंगल सिंह मंद्रवाल को कार्यवाहक कुलपति डॉ. कुसुम अरुणाचलम् ने हटा दिया है। वजह जानने के लिए करें क्लिक
दून विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. मंगल सिंह मंद्रवाल को कार्यवाहक कुलपति डॉ. कुसुम अरुणाचलम् ने हटा दिया है। उनकी जगह प्रो. एचसी पुरोहित को चार्ज दिया गया है। हैरानी की बात ये है कि डॉ. मंगल सिंह मंद्रवाल को हटाने के पीछे वजह बताई जा रही है कि उन्हें आठ दिसंबर को होने वाली कार्यकारी परिषद की बैठक की प्रत्याशा में हटाया गया है।
डॉ. मंद्रवाल दून विवि में उपकुलसचिव हैं। इसी बीच वह वीर चंद्र सिंह गढ़वाली उत्तराखंड औद्योनिकी एवं वानिकी विवि भरसार में प्रतिनियुक्ति पर कुलसचिवल बने। दून विवि में कुलसचिव का पद खाली था। लिहाजा उन्हें यहां का कार्यभार सौंपा गया।
मंद्रवाल ने बीती 11 जुलाई को कुलसचिव कार्यभार की अतिरिक्त जिम्मेदारी ग्रहण की। वहीं, बीते 16 अगस्त को डॉ. कुसुम अरुणाचलम् को राज्यपाल एवं कुलाधिपति डॉ. केके पाल ने छह महीने के लिए कार्यवाहक कुलपति मनोनीत किया था। शनिवार को अचानक कार्यवाहक कुलपति ने डॉ. मंद्रवाल को पद से हटाकर उनकी जगह डॉ. पुरोहित को जिम्मेदारी सौंप दी।
बॉयोमीट्रिक और घोटाले तो नहीं वजह
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बीते दिनों उच्च शिक्षा राज्यमंत्री धन सिंह रावत ने विवि में बायोमीट्रिक मशीन लगाने को कहा था। इस बीच चार मशीनें लगा भी दी गईं। कुलपति प्रो. कुसुम ने मशीन लगाने के कुलसचिवल मंद्रवाल के फैसले पर आपत्ति जताई।
वहीं, हाल ही में आई ऑडिट रिपोर्ट में कुलपति प्रो. कुसुम को मूल वेतन से 4,33,084 रुपये अधिक भुगतान कर दिया गया। इसे लेकर भी बवाल हुआ। एक अन्य मामले में डॉ. विजय श्रीधर और डॉ. अर्चना शर्मा को अनियमित पदोन्नति देने का मामला भी ऑडिट में सामने आया। ऑडिट की इस गड़बड़ी पर शासन ने हाल ही में कार्रवाई का पत्र जारी किया है।
ये एक्शन भी कुलसचिव के स्तर से होना था। दूसरी ओर, हाल में विवि के छात्र परिषद के अध्यक्ष सतेंद्र चौहान को छह माह के लिए निष्काषित किया गया। इस मामले में भी छात्रों ने कार्यवाहक कुलपति की भूमिका पर सवाल उठाए। बाद में विवि ने विधिक राय ली और पता चला कि विवि का फैसला गलत था। लिहाजा विवि बैकफुट पर आ गया था।
कुलसचिव पद से मंद्रवाल को हटाने के मामले में देर शाम एक और आदेश जारी हुआ, जिसमें डॉ. कुसुम अरुणाचलम् ने कहा कि कार्यकारी परिषद की बैठक में कुलसचिव पर फैसला होना है, लिहाजा उसी प्रत्याशा में डॉ. मंद्रवाल को हटाया गया है।
यह बैठक आठ दिसंबर को होनी है। जबकि, एक आदेश के तहत कार्यकाल समाप्त होने के तीन माह पहले कोई भी कुलपति न तो अकादमिक परिषद और न ही कार्यकारी परिषद की बैठक बुला सकता है। वहीं, मामले में कुलसचिव डॉ. मंगल सिंह मंद्रवाल से उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन उनका फोन नहीं उठा। पक्ष आने के बाद हम उसे प्रकाशित करेंगे।
मुझे विवि के वित्त नियंत्रक और कई प्रोफेसर्स ने बताया कि विवि एक्ट के हिसाब से डॉ. मंद्रवाल इस पद पर नहीं रह सकते। वह विवि के उप कुलसचिव थे और उसी पद पर बने रहेंगे। जो निर्णय लिया गया है, वह नियम के हिसाब है, जो कि सामान्य प्रक्रिया है।
-प्रो. कुसुम अरुणाचलम्, कार्यवाहक कुलपति, दून विवि