यानी करीब 10 से 11 घंटे में 18 मीटर। एनएचआईडीसीएल के निदेशक अंशु मलिक खल्खो का कहना है कि मशीन की गति 5 मीटर प्रति घंटा होती है लेकिन यहां अभी तक यह गति नहीं मिल पाई थी। हालांकि 2 मीटर प्रति घंटे तक की स्पीड भी बड़ी कामयाबी की ओर ले जाने वाली साबित हुई।
तीन बजे मलबा आया तो काम रोका
दिन में करीब तीन बजे अचानक मलबा आ जाने से काम रोकना पड़ा। हालांकि ये मलबा हल्का था, जिसे हटाकर दोबारा काम शुरू किया गया। खबर लिखे जाने तक ड्रिल का काम जारी था।