मलबे को रसायनों की मदद से ठोस में बदलने के बाद इसी में छोटी-छोटी तीन सुरंगें बनाई जानी है। मलबे के दायीं तरफ से एक मीटर चौड़ी सुरंग बनाने का काम करीब 25 से 30 मीटर तक पूरा कर लिया गया है। इसके बाद बायीं ओर से भी निकासी सुरंग बनाई जाएगी। फिर मलबे के बीचोंबीच भी इसी तरह की सुरंग का निर्माण होगा।
एनएचआईडीसीएल के निदेशक अंशु मनीष खलको ने बताया कि इन निकासी सुरंगों को बनाने के लिए एक विशेष फ्रेम का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसे लगाने के बाद उतने हिस्से की कटिंग के बाद आगे बढ़ा जाता है। बताया कि तीनों सुरंगें एक साथ नहीं बनाई जा सकती है, इसलिए एक-एक कर सावधानी से काम किया जा रहा है।
ड्रिफ्ट टनल बनाने का काम सावधानी से किया जा रहा है। अब तक मलबे के दायीं ओर से ड्रिफ्ट टनल की खोदाई 25 से 30 मीटर तक कर ली गई है, जिसे करीब 62 मीटर तक खोदा जाएगा। इसके बाद बायीं ओर के साथ एक टनल मलबे के बीचोंबीच भी बनाई जाएगी।
-अंशु मनीष खलको, निदेशक, एनएचआईडीसीएल।