ऐसे हुआ मामले का खुलासा
तहरीर में स्कूल प्रबंधक ने बताया, लेखा प्रभारी अनुराधा ने फर्जी फीस रसीद तैयार कर अभिभावकों से तो फीस ले ली, लेकिन स्कूल प्रबंधन को बताया कि अभिभावकों ने फीस नहीं दी है। उन्होंने फीस जमा करने के लिए समय मांगा है, लेकिन जब लगातार कुछ छात्रों की फीस बकाया होने लगी तो प्रधानाचार्य ने बच्चों के अभिभावकों से संपर्क किया, जिससे धोखाधड़ी का खुलासा हुआ। देहरादून की एक चार्टेड एकाउंटेंट फर्म से स्कूल की बैलेंस सीट तैयार कराने पर इस मामले का खुलासा हो गया। क्लर्क पर वर्ष 2017 से 2024 तक बच्चों की फीस की धनराशि के गबन का आरोप है।