कठिन है चढ़ाई, फिर भी पहाड़ चढ़ रहा बाघ
प्रो. कमर कुरैशी कहते हैं, जंगलों में बाघों के बीच अस्तित्व के लिए लड़ाई शुरू से होती रही है। जंगल का नियम है, यहां जो शक्तिशाली होगा वही उस क्षेत्र में राज करेगा। इसके चलते वयस्क नर बाघों ने ताकत के बलबूते अपनी टेरेटरी बना ली है, इसमें वह किसी और को नहीं घुसने देते। इससे खासकर उम्रदराज बाघों के लिए संकट आ रहा है। आबादी काफी बढ़ने के कारण बाघों के बीच संघर्ष की स्थिति बढ़ गई है, जबकि उम्रदराज बाघों को शिकार के लिए भी परेशान होना पड़ रहा है। कई दिनों तक भूखे रहने पर मजबूरन बूढ़े बाघ जंगल छोड़कर गांवों का रुख करने के लिए विवश हो रहे हैं। वह कहते हैं, जंगलों में संख्या अधिक होने के कारण ही कई बाघ पहाड़ों का रुख कर रहे हैं। बाघों को पहाड़ की चढ़ाई वाली स्थितियां पसंद नहीं हैं, इसके बाद भी शिकार और आशियाने की तलाश में वह पहाड़ों पर भी चढ़ रहा है।
बाघों के लिए नए ठिकाने बनाने होंगे
प्रो. कमर कुरैशी कहते हैं, लगातार बढ़ रही बाघों की संख्या और गांवों में होते बाघों के प्रवेश रोकने के लिए बाघ संरक्षित क्षेत्रों को बढ़ाना होगा। बाघों को उन जगहों पर शिफ्ट करना होगा, जहां इनकी कमी है। वन क्षेत्रों में बाघों को पर्याप्त शिकार मिले, इसकी व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी।