रविवार देर रात से हो रही बारिश के कारण सोमवार को तीर्थ नगरी ऋषिकेश में गंगा नदी का जलस्तर बढ़ गया। लक्ष्मणझूला, स्वर्गआश्रम मुनीकी रेती, तपोवन और त्रिवेणी घाट पर गंगा घाटों को छूकर बह रही है।
गंगा का जलस्तर बढ़ने से पौड़ी जिला प्रशासन, टिहरी जिला प्रशासन और देहरादून जिला प्रशासन अलर्ट हो गया है। सुरक्षा व्यवस्थाओं के लिए प्रशासन की ओर से गंगा घाट और तटों पर एसडीआरएफ के जवान और जल पुलिस की तैनाती की गई है।
वही बाढ़ ग्रस्त क्षेत्रों में स्थानीय प्रशासन ने अनाउंसमेंट के जरिए लोगों को सावधान रहने की चेतावनी दे दी है। गंगा घाटों और तटों पर पर्यटकों के साथ ही स्थानीय लोगों को प्रवेश नहीं करने दिया जा रहा है।
त्रिवेणी घाट, स्वर्गाश्रम, लक्ष्मण झूला, तपोवन के गंगा तटों पर जाने वाले मार्गों पर पुलिस प्रशासन ने बैरिकेड लगा दी है। जगह-जगह पुलिस के जवान तैनात हैं।
कुमाऊं की लाइफ लाइन कहे जाने वाले भीमताल-रानीबाग मोटर मार्ग की सुरक्षा दीवार के मूसलाधार बारिश के चलते सोमवार की सुबह टूटने से मार्ग पर आवाजाही पूर्ण रूप से बंद हो गई है। मार्ग पर आवाजाही बंद होने के बाद लोक निर्माण विभाग और पुलिस प्रशासन ने हल्द्वानी से पर्वतीय क्षेत्रों को जाने वाले वाहनों को वाया ज्योलीकोट-भवाली होते हुए भेजना शुरू कर दिया है।
वहीं भीमताल-रानीबाग मार्ग में अंतिम आदेश तक आवाजाही पर पूर्ण रूप से रोक लगा दिया है। लोनिवि के जेई केके पाठक ने बताया कि मूसलाधार बारिश के चलते रानीबाग मार्ग के पास की सुरक्षा दीवार के टूटने से मार्ग पर आवाजाही बंद कर दी गई है। पाठक ने बताया कि वाहनों को ज्योलीकोट-भवाली होते हुए भेजा जा रहा है।
बता दें कि रानीबाग के पास लोनिवि की ओर से 7.17 करोड़ की लागत से टूलेन स्पान पुल का निर्माण कार्य भी कराया जा रहा। वहीं अब भीमताल-रानीबाग मार्ग के बंद होने से भीमताल, पिथौरागढ़, धारचूला, लोहाघाट, चंपावत, बागेश्वर, अल्मोड़ा, भवाली, धानाचूली, शहरफाटक सहित अन्य पर्वतीय क्षेत्रों के वाहन चालकों और यात्रियों को अतिरिक्त सफर तय करके ज्योलीकोट-भवाली मार्ग से सफर करने को मजबूर होना पड़ेगा।
पहाड़ी दरकने से पूर्णागिरि-टनकपुर मार्ग बंद, फंसे यात्रियों को पैदल रास्ते से निकाला जा रहा
शनिवार की रात से शुरू हुई बारिश से कुमाऊं में जहां-तहां सड़कें बंद हो गईं हैं। इन सड़कों पर घंटों यात्री फंसे रहे। पूर्णागिरि धाम के हनुमानचट्टी के पास बड़ी चट्टान दरकने से पूर्णागिरि-टनकपुर मार्ग बंद हो गया। डेढ़ सौ से अधिक श्रद्धालु पूर्णागिरि क्षेत्र में फंसे हुए थे। बारिश रुकने के बाद सोमवार सुबह लोनिवि की टीम मौके पर पहुंची। मार्ग को खोलने के प्रयास जारी हैं। वहीं, शारदा-सरयू-गौला नदियां उफान पर हैं।
बारिश थमने के बाद पुलिस ने पूर्णागिरि में फंसे यात्रियों को पैदल रास्ते से निकालने की कारवाई शुरू कर दी है। मोटर मार्ग का अभी खुल पाना संभव नहीं लग रहा है। चट्टान का बड़ा पत्थर आने से जेसीबी से पत्थर हटा पाना संभव नहीं है। पत्थर तोड़कर हटाने के लिए विभाग ब्रेकर मशीन की व्यवस्था करने में लगा है। यात्रियों को पैदल रास्ते से निकाला जा रहा है।
राजधानी दून और जिले के तमाम इलाकों में भारी बारिश की संभावनाओं को देखते हुए जिलाधिकारी डॉ. आशीष कुमार श्रीवास्तव ने आपदा प्रबंधन विभाग के साथ ही राजस्व, पुलिस, सिंचाई, लोक निर्माण समेत तमाम विभाग के अधिकारियों को भी अलर्ट रहने को कहा है।
जिलाधिकारी ने सभी अधिकारियों को हिदायत दी है कि किसी प्रकार की आपदा की जानकारी मिलती है तो अधिकारी न सिर्फ तत्काल मौके पर पहुंचे, वरन आपदा राहत से जुड़े तमाम कार्यों को तेजी से कराया जाए। कहा कि यदि किसी भी स्तर पर शिथिलता बरती गई तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
रविवार को नहीं हुए सूरज के दर्शन
राजधानी दून में दिनभर आसमान में काले घने बादल छाए रहे। इससे रविवार को दिनभर सूरज के दर्शन नहीं हुए। राजधानी दून व आसपास के इलाकों में कई दौर में बारिश हुई। पटेलनगर, आईएसबीटी, माजरा, कारगी चौक, नेहरू कॉलोनी, धरमपुर, चकराता रोड, बसंत विहार, इंदिरानगर, रायपुर, डालनवाला, राजपुर समेत ज्यादातर इलाकों में दिनभर कई दौर की बारिश हुई।
10 डिग्री गिरा पारा, गर्मी से मिली निजात
राजधानी दून में पिछले 48 घंटे से हो रही बारिश के चलते अधिकतम तापमान 10 डिग्री नीचे आ गया है। मौसम विभाग के मुताबिक दो दिन पूर्व जहां अधिकतम तापमान 34 डिग्री के ऊपर था। वहीं, रविवार को अधिकतम तापमान 24 डिग्री दर्ज किया गया। दूसरी ओर तापमान गिरने के साथ ही लोगों ने गर्मी से राहत की सांस ली है।