विंटर बारिश के आंकड़ों में आई कमी
मौसम के बदले पैटर्न और जलवायु परिवर्तन के चलते बीते कुछ सालों से विंटर बारिश के आंकड़ों में भारी कमी आई है। इसका असर ग्लेशियर में बर्फ की चादर पर पड़ रहा है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि बर्फबारी के लिए बारिश का होना बहुत जरूरी है। बारिश से ही तापमान में गिरावट आती है और तापमान शून्य पहुंचने पर ही बर्फबारी होती है।
लेकिन बीते कुछ सालों से ऐसा कम हो रहा है। जनवरी के बाद अब तक की फरवरी में लंबे ब्रेक के बाद बारिश-बर्फबारी हुई तो ग्लेशियर रिचार्ज होने के साथ ठंड में इजाफा हो गया। हालांकि दोपहर बाद मौसम साफ हुआ तो थोड़ी राहत मिली और इसका असर रात के न्यूनतम तापमान में भी देखने को मिला। दून समेत प्रदेश भर का न्यूनतम तापमान सामान्य रिकॉर्ड किया गया।