वहीं, चमोली के ज्योतिर्मठ में सुराई थोटा पर मलबा आने के कारण मलारी हाईवे दो जगह पर बंद हो गया। इससे 47 यात्री व स्थानीय लोग रास्ते में ही फंस गए थे। एसडीआरएफ ने तीन यात्रियों को को रेस्क्यू कर दिया, लेकिन स्थानीय लोग आसपास के गांवों में चले गए। लाता गांव के समीप भी हाईवे बंद रहा। प्रशासन ने पर्यटकों व स्थानीय लोगों को मलारी में ही रुकवा दिया। इधर, ज्योतिर्मठ नगर क्षेत्र में मलबा आने से नृसिंह मंदिर मार्ग करीब दो घंटे बंद रहा। ऐसे में बदरीनाथ जाने वाले वाहनों को बाजार से भेजा गया।
इधर कमेड़ा में मलबा आने के कारण बदरीनाथ हाईवे बाधित हो गया और यहां करीब 500 वाहन फंस गए। इस दौरान कुछ वाहनों को गौचर-सारी-छिनका मार्ग से रुद्रप्रयाग के लिए भेजा गया, लेकिन यहां भी सड़क बंद होने पर रात को 25 से अधिक तीर्थयात्री जंगल में फंस गए। सूचना पर डीएम संदीप तिवारी ने रात को ही जेसीबी मौके पर भिजवाई। रात 10:30 बजे सड़क खुली और तीर्थयात्री रवाना हुए। कमेड़ा में बंद हुआ बदरीनाथ हाईवे 19 घंटे बाद खुल पाया। दूसरी ओर दिवालीखाली में नैनीताल हाईवे दो घंटे बंद रहा जबकि थराली के सुनला में खुलता बंद होता रहा। इधर, पर्थाडीप भूस्खलन क्षेत्र में लगातार भूस्खलन के कारण शुक्रवार को बदरीनाथ हाईवे दिनभर बंद रहा। चमोली और नंदप्रयाग से वाहनों को नंदप्रयाग-सैकोट-कोठियालसैंण सड़क से भेजा गया। पौड़ी जिले में धौलीधार के निकट लगातार मलबा गिरने से ऋषिकेश-बदरीनाथ राजमार्ग पर पूरी तरह से बाधित हो गया। यहां देवप्रयाग में यातायात रोक दिया गया और वाहनों को गजा चाका व श्रीनगर से मलेथा-टिहरी होकर ऋषिकेश की ओर डायवर्ट किया।
चमोली की पिंडर घाटी में भी बारिश के कारण पिंडर नदी उफान पर रही। इससे जहां, सरस्वती शिशु मंदिर, पिंडर पब्लिक स्कूल और बेतालेश्वर मंदिर में नदी का पानी भर गया। वहीं थराली में नदी किनारे बने पांच से अधिक घरों के भूतल में भी पानी भर गया। नदी किनारे और आपदा प्रभावित क्षेत्र के लोग रातभर जागते रहे। टिहरी जिले में भी बारिश के कारण लोनिवि की पांच और पीएमजीएसवाई की 10 सड़कें बंद रहीं। पौड़ी जिले के कोटद्वार क्षेत्र में बारिश के कारण लोनिवि और पीएमजीएसवाई की 33 सड़कों पर आवाजाही बाधित रही।