इसके बाद किसी ने नहीं सोचा था कि अचानक बाढ़ से भयंकर तबाही का एक और मंजर देखने को मिलेगा, लेकिन सात फरवरी 2021 ऋषिगंगा में बाढ़ से जोशीमठ स्थित एनटीपीसी की जल विद्युत परियोजना में 204 लोग मारे गए या लापता हो गए। मानसून की विदाई के बाद जब पूरा प्रदेश शीत ऋतु में दाखिल हो चुका है, ऐसे में रिकार्ड तोड़ बारिश से मची तबाही ने अब तक 55 लोगों को मौत की नींद सुला दिया है।
आपदाएं आती रहेंगी, विकास का मॉडल बदलना होगा : सुरेश भाई
पर्यावरण कार्यकर्ता सुरेश भाई का मानना है कि आपदा के कहर को जलवायु परिवर्तन मानकर हम अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकते। उनका कहना है कि उत्तराखंड आपदाओं की लिहाज से बेहद संवेदनशील है और अत्यधिक बारिश, भूकंप, बाढ़, भूस्खलन की घटनाएं हमेशा आती रहेंगी। उनकी नजर में आपदाओं में होने वाले नुकसान की वजह बेतरतीब विकास है। वह विकास के मॉडल के बदलने की वकालत करते हैं।
दिखावटी नहीं टिकाऊ विकास हो : नौटियाल
सोशल डेवलपमेंट फॉर कम्युनिटी फाउंडेशन के संस्थापक अनूप नौटियाल का कहना है कि एक बार फिर प्राकृतिक आपदा ने विकास के मॉडल पर सवाल खड़े किए हैं। अरबों रुपये की योजनाओं में दिखावे पर ज्यादा फोकस है। जबकि हमारा जोर टिकाऊ विकास पर होना चाहिए। नैनीताल के हालात इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। अंग्रेज जो ड्रेनेज सिस्टम तैयार कर गए थे, वह खत्म हो चुका है। अब थोड़ी बारिश में ही शहरों और कस्बों में जलभराव आम बात है।