भीषण गर्मी के बाद हुई बारिश से तापमान तो गिरा, लेकिन बारिश थमने के बाद अब उमस बढ़ गई है। इससे लोगों में थकान, बेचैनी और चिढ़चिढ़ापन बढ़ गया है। डॉक्टरों के मुताबिक उमस भरा मौसम शरीर के लिए सहना मुश्किल होता है। इस दौरान पसीना अधिक आता है इसलिए पानी की कमी न होने दें। ज्यादा नमी शरीर को प्रभावी रूप से ठंडा होने से भी रोक सकती है, इससे चिपचिपाहट होती है।
दून मेडिकल कॉलेज, अस्पताल की इमरजेंसी इंचार्ज डॉ. एनएस बिष्ट ने बताया कि उमस के मौसम में धूप में, घर के बाहर खुले में काम करने वाले लोगों विशेष रूप से मजदूरों को अधिक ध्यान रखने की जरूरत है। शरीर में पानी की कमी बिल्कुल न होने दें। शरीर ज्यादा गर्म होता है, तो यह त्वचा की सतह पर पानी और नमक का मिश्रण भेजता है।
गर्मी कम होने पर करें वर्कआउट
यह पसीने के रूप में बाहर निकलता है। अधिक पसीना आने पर पानी की कमी हो जाएगी। इससे थकावट, कमजोरी, डिहाइड्रेशन के साथ ही बेचैनी बढ़ सकती है। डॉ. बिष्ट ने बताया कि इस मौसम में तेज गतिविधि शरीर को ज्यादा गर्म कर सकती है। इसलिए वॉक, साइकिलिंग या वर्कआउट का समय बदल देना चाहिए। सुबह या शाम गर्मी कम होने पर वर्कआउट करें।
वहीं, दून मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अंकुर पांडेय ने बताया कि उमस से चिपचिपाहट, गीलापन, त्वचा संबधी दिक्कतें और पित्त बढ़ने की समस्या हो सकती है। ऐसे में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें। चिपचिपाहट दूर करने के लिए स्नान करें।
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स्किन को सूखा रखने के लिए पाउडर का उपयोग करें। डॉ. अंकुर ने बताया कि पानी पीते रहें। घर में हवा आने-जाने के रास्ते खुले रखें। बच्चे, बुजुर्ग, डायबिटीज और दिल के मरीजों का विशेष ध्यान रखें। धूप से बचाव करें। चक्कर आएं, भ्रम हो या शब्द उच्चारण गड़बड़ लगे तो डॉक्टर से सलाह लें।