एक अनुमान के अनुसार, राज्य में एक लाख से अधिक परिवार विभिन्न श्रेणियों की सरकारी भूमि पर दशकों से काबिज हैं। मालिकाना अधिकार न होने से वे इस भूमि का उपयोग नहीं कर पा रहे हैं। सरकार को भी कब्जे की भूमि से कोई राजस्व प्राप्त नहीं हो रहा है। इस समस्या के समाधान के लिए सरकार ने कब्जे की भूमि पर मालिकाना हक देने का निर्णय लिया है। उपसमिति को यह तय करना है कि किस श्रेणी की भूमि का नियमित करना व्यावहारिक होगा।
बैठक में उपसमिति को बताया गया कि विभिन्न श्रेणियों की भूमि पर कब्जे के बारे में 10 जिलों की रिपोर्ट आ चुकी है। उपसमिति के अध्यक्ष कैबिनेट मंत्री उनियाल ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि भूमि पर मालिकाना हक दिये जाने के संबंध में गंभीरतापूर्वक कार्य किया जाना है। बैठक में कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा, प्रमुख सचिव आरके सुधांशु उपस्थिति थे।