उत्तराखंड की पहाड़ियों में बर्फीले तूफान और भारी बर्फबारी का अलर्ट जारी किया गया है। लोग खौफ के साये में जीने को मजबूर हैं। विडंबना यह है कि सिस्टम ठंडा पड़ा है।
जून 2013 जैसी महाआपदाओं को झेलने के बाद भी इस राज्य ने पूर्व चेतावनी तंत्र (अर्ली वार्निग सिस्टम) विकसित नहीं किया। ऊंचाई वाले इलाकों में 22 को भारी बर्फबारी की आशंका है।
बुधवार को एक बार फिर चार जिलों में बर्फीले इलाके में तूफान को लेकर सजग रहने की जानकारी देने के अलावा शासन और कोई कदम नहीं उठाया। प्रदेश में पूर्व चेतावनी तंत्र के न होने का नतीजा यह है कि इस बार के बर्फीले इलाकों में तूफान के अलर्ट को लेकर अफरा-तफरी के हालात हैं।
पता नहीं किस इलाके में आएगा तूफान
गृह मंत्रालय की ओर से जारी अलर्ट में 2500 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले इलाकों में हिमस्खलन की आशंका जताई गई है। इस अलर्ट केआधार पर अभी यह साफ नहीं हो पाया है कि चमोली, उत्तरकाशी, पिथौरागढ़ और टिहरी के कौन से इलाके बर्फबारी या हिमस्खलन से प्रभावित हो सकते हैं।
ऐसे में राज्य का आपदा प्रबंधन तंत्र तूफान के आने का ही इंतजार कर रहा है। तूफान अगर आया तो इसके गुजर जाने के बाद ही मशीनरी हरकत में आ पाएगी। निजमुला घाटी में आए तूफान से भी यही साबित हुआ था। निजमुला में तूफान के दौरान कोई कुछ नहीं कर पाया और तूफान के गुजरने के बाद ही आपदा प्रबंधन की टीम निजमुला घाटी पहुंची थी।
हिमाचल ज्यादा अलर्ट
उत्तराखंड की अपेक्षा हिमाचल की आपदा प्रबंधन की तैयारी ज्यादा बेहतर है। हिमाचल अब डाप्लर रडार लगाने की तैयारी में है। शिमला के नजदीक जाखू में दो एकड़ जमीन का प्रबंध डाप्लर रडार के लिए कर चुकी है। उसके पास पहले से ही 27 स्वचालित रेन गॉज और 70 वेदर ऑब्जर्ववेटरी हैं।
हिमाचल में स्नो एवलांच स्टडी इस्टेब्लिशमेंट (सासा) है। उसके पास हिमस्खलन की पूर्व चेतावनी का पूरा विकसित तंत्र है। यह भी बताया जा रहा है कि हिमस्खलन की चेतावनी भी सासा ने ही जारी की थी जो गृह मंत्रालय के जरिए उत्तराखंड को मिली।
उत्तराखंड में कब लगेगा डाप्लर रडार
उत्तराखंड में जून 2013 की आपदा के बाद केंद्र ने तीन डाप्लर रडार स्थापित करने के लिए 116 करोड़ रुपये की परियोजना मंजूर की थी। इसके तहत देहरादून में सुरकंडा, गैरसैंण और नैनीताल में डाप्लर रडार लगाया जाना है। अभी तक सुरकुंडा में ही भूमि चिह्नित हो पाई है। भूमि हस्तांतरण प्रक्रिया चल रही है।
उत्तराखंड में अब 64 ऑटोमेटिक वेदर स्टेशन स्थापित करने के लिए जिलाधिकारियों को भूमि चयन का आदेश जारी किया गया है। सूत्रों के मुताबिक सासा अब उत्तराखंड में दो डाप्लर रडार पिथौरागढ़ और एक रडार मसूरी में लगाने की भी तैयारी में है।
प्रदेश में आज हर तरफ गरज-बरस संभव
प्रदेश में गुरुवार को हर तरफ गरज, बरस के आसार हैं। राज्य मौसम केंद्र के पूर्वानुमान के मुताबिक उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़, अल्मोड़ा और बागेश्वर जिलों में मध्यम से अधिक बारिश और बर्फबारी हो सकती है।
राज्य के 2300 मीटर से 3300 मीटर तक ऊंचाई पर 5 से 15 सेंटीमीटर, जबकि इससे अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में 15 से 30 सेंटीमीटर तक बर्फबारी की आशंका बनी हुई है। 3300 मीटर से अधिक ऊंचाई पर ओलावृष्टि की भी आशंका है। राजधानी दून में भी बादल छाए रहेंगे। दिन में हल्की से मध्यम वर्षा की प्रबल संभावना बनी हुई है।