बजट सत्र की तैयारी को लेकर मंगलवार को विधानमंडल भवन स्थित अपने कार्यालय कक्ष में विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल ने विधानसभा उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह चौहान से मंत्रणा की। इस बार का बजट सत्र ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण (भराड़ीसैंण) में एक मार्च से होना है।
बता दें कि बजट सत्र भराड़ीसैंण विधानसभा में कराए जाने के मुख्यमंत्री के एलान के बाद ही विधानसभा अध्यक्ष ने विधानसभा के अधिकारियों को तैयारी के संबंध में दिशा-निर्देश दे दिए थे।
मंगलवार को विधानसभा उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह चौहान ने अग्रवाल से शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान दोनों नेताओं ने आगामी बजट सत्र की तैयारियों पर चर्चा की। इस दौरान उपाध्यक्ष ने पहाड़ों में जिला विकास प्राधिकरणों को समाप्त किए जाने की घोषणा का स्वागत किया।
उन्होंने इसके लिए विधानसभा अध्यक्ष और मुख्यमंत्री का आभार प्रकट किया। विधानसभा अध्यक्ष ने ही पीठ से पहाड़ों में जिला विकास प्राधिकरण की कार्यप्रणाली को लेकर विधायक चंदन राम दास की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन किया था। इस कमेटी ने प्राधिकरणों को समाप्त करने की सिफारिश की थी। विधानसभा अध्यक्ष ने कमेटी की सिफारिशों को कार्रवाई के लिए राज्य सरकार को भेजा था।
अखिल भारतीय श्रीपंच रामानंदीय खाकी अखाड़ा के महंत मोहनदास ने कहा है कि कुंभ मेले के स्वरूप को लेकर राज्य सरकार को संतों के साथ वार्ता करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि बैरागी कैंप क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाएं जल्द नहीं दी गई तो संत आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे।
पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और भारतीय संस्कृति का सबसे बड़ा पर्व कुंभ मेला 12 वर्ष बाद होता है। श्रद्धालुओं की आशाएं सनातन संस्कृति से जुड़ी हुई हैं। ऐसे में श्रद्धालुओं की भावना आहत न हों सरकार को ध्यान देना चाहिए।
श्रीमहंत मोहनदास ने मेला प्रशासन पर बैरागी कैंप क्षेत्र की उपेक्षा का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि बैरागी संत लाखों की संख्या में कुंभ मेले में देशभर से हरिद्वार आते हैं। उनके लिए व्यवस्थाएं जुटाना सरकार का दायित्व है। धर्म आस्था के साथ किसी प्रकार का खिलवाड़ नहीं किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि वृंदावन कुंभ के बाद वैष्णव संत हरिद्वार आएंगे। इसके बाद भी यदि व्यवस्था मेला प्रशासन की ओर से नहीं की जाती है, तो उग्र आंदोलन किया जाएगा। सरकार कोरोना काल में अपनी रैलियां कर सकती है तो फिर कुंभ के आयोजन को लेकर संतों की आस्था के साथ छेड़छाड़ क्यों की जा रही है। उन्होंने कहा कि संतों ने आंदोलन किया तो सरकार को संभालना मुश्किल होगा।