केंद्रीय स्वास्थ्य परिवार कल्याण मंत्रालय ने कुंभ मेले की अवधि कम करने को कहा है। प्रदेश सरकार की 27 फरवरी से कुंभ मेले की अधिसूचना जारी करने की तैयारी है। माना जा रहा है कि जिस दिन सरकार मेले की अधिसूचना जारी करेगी, कुंभ मेले की जिम्मेदारी भी उसके कंधों पर आ जाएगी। ऐसे में सवाल है कि क्या सरकार कुंभ मेले की अवधि को कम कर सकती है। मंत्रिपरिषद की बैठक के बाद यह चर्चा है कि सरकार अप्रैल में पहले मुख्य स्नान से ठीक पहले अधिसूचना जारी कर सकती है।
उलझन में सरकार, सामने कई सवाल
कुंभ मेले को लेकर सरकार उलझन में है। एक ओर आस्था का सवाल है, दूसरी ओर कुंभ मेले में भारी भीड़ जुटने से कोरोना संक्रमण फैलने का खतरा है। ऐसे में सरकार कुछ सवालों में उलझी है।
क्या हर दिन श्रद्धालुओं की संख्या निर्धारित होगी
राज्य सरकार को हर दिन आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या को भी निर्धारित करना है ताकि वह कोविड-19 महामारी के संक्रमण को रोकने के लिए सामाजिक दूरी, मास्क का उपयोग और सैनिटाइजेशन के प्रयोग को सहज तरीके सुनिश्चित कर सके लेकिन जानकारों का कहना है कि कुंभ मेले के दौरान सामान्य दिनों में ही लाखों की संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है।
केंद्र सरकार ने राज्य से यह भी कहा है कि कोविड की निगेटिव रिपोर्ट लेकर आने वालों को ही कुंभ मेले में प्रवेश की अनुमति हो। ऐसे में सरकार लाखों श्रद्धालुओं की कोविड रिपोर्ट जांचने और आरटीपीसीआर जांच की व्यवस्था कराने में बड़ी मैनपावर की जरूरत पड़ेगी।
साधु संतों को मनाना क्या आसान होगा
सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती अखाड़ों, साधु व संतों को राजी कराना है। केंद्र सरकार की एसओपी को लागू कराने के लिए साधु संतों का सहयोग सबसे जरूरी है।
दूसरे राज्य कितना सहयोग करेंगे
कुंभ मेले में पूरे देश और विदेश से भी श्रद्धालु आते हैं। इसमें उत्तराखंड सरकार दूसरे राज्यों की सरकारों से सहयोग की अपील कर रही है। सरकार चाहती है कि कुंभ में आने वाले श्रद्धालुओं के पंजीकरण और उनकी कोविड रिपोर्ट के मामले में राज्य सरकारें सहयोग करें। वे अपने राज्यों में ही ऐसी व्यवस्था करें कि वहीं से श्रद्धालु सीमित संख्या में कुंभ मेले में आएं।