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Uttarakhand Chunav 2022: मतगणना से पहले प्रदेश में कैलाश विजयवर्गीय की एंट्री, ए, बी और सी प्लान बनाकर चलेगी भाजपा

Mon, 07 Mar 2022 02:03 PM IST
रेनू सकलानी न्यजू डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में कांटे की टक्कर के आसार हैं। जोड़तोड़ की रणनीति में माहिर माने जाने वाले विजयवर्गीय की एंट्री से प्रदेश में हलचल बढ़ गई है। 
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भाजपा महासचिव कैलाश विजयवर्गीय - फोटो : ANI
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विस्तार
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 विधानसभा चुनाव की मतगणना से पहले भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री कैलाश विजयवर्गीय की रविवार को उत्तराखंड में एंट्री हुई है। उन्होंने पहले पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक से उनके आवास पर मंत्रणा की। उसके बाद सुभाष रोड स्थित एक होटल में पार्टी के दिग्गज नेताओं के साथ मतगणना के बाद की स्थिति पर मंत्रणा की है। 

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प्रदेश में 10 मार्च को मतगणना के बाद चुनाव नतीजे सामने आएंगे। मतगणना से पहले भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री कैलाश विजयवर्गीय दून पहुंचे। उन्हें जोड़तोड़ की राजनीति का रणनीतिकार माना जाता है। 2016 में कांग्रेस में सेंधमारी के असल सूत्रधार विजयवर्गीय ही थे। पार्टी सूत्रों के मुताबिक चुनाव मतगणना से पहले भाजपा केंद्रीय नेतृत्व ने उन्हें खास मिशन को अंजाम देने के लिए भेजा है।

राष्ट्रीय महामंत्री ने सबसे पहले पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निंशक के निजी आवास पर जाकर उनसे मंत्रणा की है। शाम को सुभाष रोड स्थित एक होटल में उन्होंने प्रदेश चुनाव प्रभारी प्रह्लाद जोशी, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक के साथ चुनाव नतीजे के बाद बनने वाली स्थिति को लेकर रणनीति पर विचार किया। 
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ए, बी और सी प्लान बनाया
मतगणना के बाद बनने वाली परिस्थितियों में पार्टी और शीर्ष नेताओं की क्या भूमिका होगी। इस पर चर्चा की गई। पार्टी सूत्रों के मुताबिक भाजपा ए, बी और सी प्लान प्लान बनाकर चलेगी। हालांकि भाजपा राष्ट्रीय महामंत्री का कहना है कि उत्तराखंड में बहुमत जुटाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। यहां भाजपा पूर्व बहुमत के साथ सत्ता में आ रही है। 

बहुमत नहीं मिला और सबसे बड़ा दल बना तो
प्लान बी के तहत पार्टी की दूसरी रणनीति बहुमत के आंकड़े से दूर लेकिन सबसे बड़े दल के रूप में सामने आने पर शीर्ष नेताओं की भूमिका अहम हो जाएगी। सियासी हलकों में जिस तरह से चर्चा गर्म है कि कुछ निर्दलीय चुनाव जीत सकते हैं। उन्हें साधने की जिम्मेदारी भी अहम नेताओं को दी जा सकती है। 
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मुकाबला बराबरी का रहा तो
प्लान सी के तहत यदि भाजपा और कांग्रेस के बीच सीटों का बंटवारा बराबरी का हुआ या एक-दो सीटों का ही अंतर रहा तो ऐसी स्थिति में भाजपा की क्या रणनीति होगी। इस विषय पर भी दिग्गज नेताओं ने रणनीति बनाई है।

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