मैं और मेरे जैसे युवा, जो घुमक्कड़ किस्म हैं उनके लिए सबसे मुश्किल समय था लॉकडाउन। लॉकडाउन खुला, लेकिन शहर में वह सुकून नहीं मिला। यह कहना है कि पार्थ गुसाईं का। फूलों की घाटी से हाल ही में लौटे दून के पार्थ ने बताया कि लॉकडाउन के बाद से हर महीने कहीं न कहीं ट्रेकिंग पर जाना होता है। यहां आसपास की खूबसूरत जगह पर तो हम अपना समय बिताने जाते ही हैं, लेकिन हमने शहर से दूर जाने का सोचा और दोस्तों के साथ फूलों की घाटी जाने का प्लान बनाया। कहा कि हमारे उत्तराखंड में इतनी खूबसूरत जगह हैं कि यहां जितना घूम लो, कम है। अब हमारा ज्यादातर ठिकाना पहाड़ों में ही होता है।
दोस्तों संग ट्रेकिंग का लुत्फ उठा रहे भूपेंद्र
शहर के शोर शराबे से दूर भूपेंद्र इन दिनों अपने छह दोस्तों के साथ ट्रेकिंग का मजा ले रहे हैं। भूपेंद्र ने बताया कि लॉकडाउन में दोस्तों के साथ ट्रेकिंग का प्लान बनाया था। इन दिनों हम मद्महेश्वर ट्रेकिंग रुट पर और लौटने की तैयारी कर रहे हैं। कहा कि कोरोना काल के बाद सुकून महसूस करने के लिए पहाड़ों से अच्छी जगह कोई दूसरी नहीं है। शहर की भागदौड़ भरी जिंदगी में सुकून की तलाश हर किसी को है और यह प्रकृति के करीब रहकर ही महसूस किया जा सकता है।