बिना नक्शा पास किए और जमीन ट्रांसफर किए पेयजल निगम ने गोरखपुर ट्यूबवेल के पास लाखों रुपये का भवन खड़ा कर दिया। इस बात का खुलासा सूचना के अधिकार में मांगी सूचना के बाद हुआ है। बिना नक्शा पास किए और जमीन ट्रांसफर किए बिल्डिंग बनाने से जहां निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल तो उठ ही रहे हैं, वहीं भविष्य में अगर यह जमीन किसी निजी व्यक्ति की निकली तो पेयजल निगम को जबाब देना भारी पड़ सकता है।
दरअसल, पेयजल निगम विश्वबैंक वित्त पोषित मेहूंवाला कलस्टर पेयजल योजना के तहत सहसपुर और धर्मपुर विधानसभा के कई इलाकों में नई पेयजल योजना पर काम कर रहा है। योजना के तहत विभाग की ओर से गोरखपुर ट्यूबवेल के पास लाखों रुपये की लागत से कार्यालय का निर्माण कराया है।
सामाजिक कार्यकर्ता बीरू बिष्ट ने इस संबंध में जब सूचना के अधिकार में जल निगम से कार्यालय निर्माण में भू अभिलेखों और नक्शे के बारे में जानकारी चाही तो जल निगम का कहना है कि जब जून 2020 मेें जब जल संस्थान ने पेयजल निगम को पेयजल योजना हस्तानांतरित की तो पेयजल निगम को जमीन संबंधी कोई भी दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए।
वहीं नक्शे के बारे में भी जलनिगम कोई जबाब नहीं दे पाया। जबकि नगर निगम क्षेत्र में नक्शा पास करवाना अनिवार्य हैं। ऐसे मे सवाल यह उठता है कि अगर भविष्य में जहां जल निगम की ओर से कार्यालय बनाया गया है, उस पर कोई निजी व्यक्ति अपना हक जताता है तो निगम क्या करेगा।
दूसरी और इतनी बड़ी योजना में पेयजल निगम की ओर से नियमों को तार-तार करना पेयजल निगम की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े करता है। हालांकि इस संबंध में पेयजल निगम के अधिकारियों का कहना है कि जमीन के अभिलेख जलसंस्थान के पास होंगे लेकिन उन्हें देखना पड़ेगा।
निगम ने जो कार्यालय बनाया है, वह कार्मिशियल नहीं है। सरकारी होने के कारण नक्शा पास करने की कोई जरूरत नहीं है। जहां तक जमीन के अभिलेखों की बात है तो यह सालों से जलसंस्थान के कब्जे में थी। इसलिए उन्हीं के नाम दर्ज होगी। आवश्यकता पड़ने पर कागजातों को दिखाया जाएगा।
- सीता रत, महाप्रबंधक, पेयजल निगम