प्रदेश में एक साल में 1674 हादसे हुए, जिनमें 1042 मौतें हुईं और 1613 लोग घायल हुए। राष्ट्रीय राजमार्ग, राज्य राजमार्ग और अन्य मार्गों पर हुए हादसों को देखें तो पैदल पथ के 203 हादसे हुए, जिनमें 106 लोगों की मौत हुई।
सड़क किनारे पैदल चलना भी सुरक्षित नहीं है। प्रदेश में पिछले एक साल में दुपहिया, कार-टैक्सी हादसों के बाद सबसे ज्यादा मौतें पैदल चलने वालों की ही हुई हैं। वहीं, शराब पीकर वाहन चलाने वालों के बजाए ओवर स्पीड वाहनों की वजह से सबसे ज्यादा सड़क हादसे हुए हैं।
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केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदेश में एक साल में 1674 हादसे हुए, जिनमें 1042 मौतें हुईं और 1613 लोग घायल हुए। राष्ट्रीय राजमार्ग, राज्य राजमार्ग और अन्य मार्गों पर हुए हादसों को देखें तो पैदल पथ के 203 हादसे हुए, जिनमें 106 लोगों की मौत हुई। कार, टैक्सी और वैन के 275 हादसों में 143 की मौत हुईं।
दुपहिया वाहन के 246 हादसों में 204 की मौत हुई। साइकिल के 16 हादसों में 08 मौतें, ऑटो रिक्शा के 15 हादसों में 06, ट्रक के 39 हादसों में 21, बस के 16 हादसों में 02 और ई-रिक्शा के 16 हादसों में 16 मौतें हुईं। विशेषज्ञों का मानना है कि पैदल चलने वालों की मौतों का आंकड़ा ये बयां कर रहा है कि दूसरे वाहन गलत संचालन की वजह से उनके लिए मौत का सबब बन रहे हैं।
ओवर स्पीड में सबसे ज्यादा मौतें
प्रदेश में एक साल में ओवर स्पीड के कारण 622 सड़क हादसे हुए, जिनमें 387 लोगों की मौत हुईं। गलत दिशा में वाहन चलाने की वजह से 66 हादसे हुए, जिनमें 22 की मौत हुई। शराब पीकर वाहन चलाने वालों के नौ हादसों में पांच मौतें हुईं।
ग्रामीण क्षेत्रों में ज्यादा हादसे और मौतें
ग्रामीण क्षेत्रों में एक साल में 845 हादसे रिकॉर्ड में आए, जिनमें 687 की मौत हुई और 850 घायल हुए। शहरी क्षेत्रों में 829 हादसों में 355 की मौत हुई और 763 लोग घायल हुए।