मस्ताड़ी गांव में घरों के अंदर जमीन के नीचे से पानी के बहने की आवाज आती है। ऐसा महसूस होता है कि जमीन के अंदर बड़ा नाला बह रहा हो। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में जमीन के अंदर पानी बह रहा है। कई घरों में यह पानी निकल भी रहा है।
50 परिवारों के लिए तीन टैंट
बीते दिनों से लगातार हुई बारिश के चलते गांव में कई घरों में दरारें पड़ गई हैं और कई घरों के आंगन टूट गए हैं। गांव में भू-धंसाव से करीब 50 परिवार प्रभावित हैं। लेकिन प्रशासन ने मात्र तीन टैंट दिए हैं। ग्राम प्रधान सत्य नारायण सेमवाल ने बताया कि प्रशासन उनकी समस्या को गंभीरता से नहीं ले रहा है। गांव में किसी भी समय बड़ी दुर्घटना हो सकती है। बताया कि ग्रामीण किसी सुरक्षित जगह पर विस्थापित करने की मांग कर रहे हैं, लेकिन अधिकारी उनकी फरियाद को अनसुना कर रहे हैं।
भूवैज्ञानिक की सलाह
प्रशासन ने वर्ष 1997 में मस्ताड़ी गांव का भूसर्वेक्षण कराया था। तब भूवैज्ञानिक डीपी शर्मा ने गांव में सुरक्षात्मक कार्यों की सलाह दी थी। उन्होंने प्रशासन को सौंपी रिपोर्ट में कहा था कि भू-धंसाव क्षेत्र में भूमि संरक्षण विभाग से सर्वेक्षण कराकर चैकडेम, सुुरक्षा दीवार का निर्माण व पौधरोपण किया जाए। मकानों के चारों ओर पक्की नालियों का निर्माण कर पानी की निकासी की व्यवस्था की जाए।