4. चारधाम यात्रा के दौरान मौतें
राज्य में पर्यटन और तीर्थांटन पर हर साल लाखों लोग आते हैं। चारधाम यात्रा के दौरान हर साल लोगों की मौत होती है। 2017 में 112, 2018 में 106, 2019 में 91 लोगों की मौत यात्रा के दौरान हुई।
5. आपदा और बादल फटने की घटनाएं
उत्तराखंड में प्राकृतिक आपदाओं को नहीं रोका जा सकता। लेकिन इनसे होने वाली जनहानि को रोकने के उपाय जरूर किए जा सकते हैं। आपदा और बादल फटने की घटनाओं में लोग गंभीर रूप से घायल होते हैं। समय पर इलाज मिलने की दशा में कई जिंदगियों को बचाना संभव है।
एक ही इलाज: सुविधाएं या एंबुलेंस
पहाड़ के जनमानस के जीवन में शूल की तरह चुभने वाले ये पांच जख्मों का एक ही इलाज है कि या तो सरकार पर्वतीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं को शहरी क्षेत्रों की तरह मजबूत बनाए या फिर रोगियों और दुर्घटनाओं में घायल होने वाले लोगों को तत्काल हायर सेंटर में इलाज कराने के लिए एयर एंबुलेंस की सेवा को शुरू करे।
सरकार के संज्ञान में एयर एंबुलेंस का मामला लाया गया है। इस बारे में उच्च स्तर पर चर्चा हो रही है। जल्द कोई न कोई समाधान निकाला जाएगा।- शत्रुघ्न सिंह, मुख्य सलाहकार, मुख्यमंत्री
उत्तराखंड को कम से कम दो एडवांस कार्डिक लाइफ सपोर्ट एयर एंबुलेंस की जरूरत है। आपदा ग्रसित प्रदेशों के लिए यह जरूरी है। एयर एंबुलेंस को आयुष्मान सेवा से जोड़ना भी आवश्यक है ताकि समाज के सभी वर्ग इस सुविधा का लाभ ले सकें।- अनूप नौटियाल, समाज सेवी व प्रदेश में 108 एंबुलेंस सेवा के पूर्व स्टेट हैड
राज्य सरकार एयर एंबुलेंस का संचालन अपने खर्च से कर सकती है। तीन माह के तीन एयर एंबुलेंस का खर्च पांच करोड़ अनुमानित है। राज्य सरकार सीएसआर फंड से यह राशि जुटा सकती है। मैंने यह सुझाव प्रमुख सलाहकार मुख्यमंत्री को दिया है।- रविंद्र जुगरान, पूर्व राज्य आंदोलनकारी