केदारनाथ व हेमकुंड साहिब जैसे धार्मिक स्थलों पर लंबी पैदल यात्रा कर पहुंचा जाता है। इसमें अधिक समय लगने के साथ ही महिलाओं, बुजुर्गों तथा बच्चों को यात्रा के दौरान अनेक दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। रोपवे निर्माण हो जाने के बाद तीर्थ यात्रियों को आसानी से कम समय में पूरा कर दर्शन का लाभ प्राप्त हो सकेगा। इसके साथ ही देहरादून से मसूरी, पुर्णागिरी और सुरकंडा देवी रोपवे को पीपीई मोड पर बनाने व संचालित किए जाने की कार्रवाई की गई। सुरकंडा देवी रोपवे का संचालन इस साल के अंत में किया जाएगा।
पर्यटन सचिव दिलीप जावलकर ने कहा कि सभी रोपवे निर्माण से यात्री प्रदूषण मुक्त सफर का आनंद ले सकेंगे। रोपवे के जरिये केदारनाथ और हेमकुंड साहिब जैसे धार्मिक स्थानों पर हर उम्र का तीर्थयात्री पहुंच सकेगा।
मुख्य सचिव उत्तराखंड डॉ.एसएस संधू की मौजूदगी में उत्तराखंड पर्यटन की ओर से अपर सचिव पर्यटन युगल किशोर पंत, सड़क, परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के एनएचएलएमएल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रकाश गौड़ ने समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। इस मौके पर प्रमुख सचिव आरके सुधांशु, एनएचएलएमएल के चेयरमैन मनोज कुमार, पर्यटन विकास परिषद के वरिष्ठ शोध अधिकारी एसएस सामंत मौजूद थे।
प्रदेश के सात स्थानों पर रोपवे निर्माण होने से निश्चित रूप से प्रदेश में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। इसके साथ ही देश-दुनिया के तीर्थयात्री व पर्यटक उत्तराखंड में रोमांच भरे सफर का आनंद भी उठा सकेंगे। सभी सात रोपवे देश सहित विदेश के पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनेंगे।
- सतपाल महाराज, पर्यटन मंत्री