उमा भारती का यह मनाना है कि अगर स्थानीय जनता उनका साथ देती तो वो मंदिर को डूबने नहीं देतीं। इस पूरे मामले में तब स्थानीय लोग दो धड़ों में बंट चुके थे। एक पक्ष बांध निर्माण के विरोध में था और दूसरा बांध बनाने के पक्ष में। अधिकांश लोग वो थे, जो बांध से प्रभावित थे।
जब धारी देवी की मूर्ति को मूल स्थान से उठाया जा रहा था तो इसको लेकर पूर्व जल संसाधन मंत्री उमा भारती और पूर्व मुख्य मंत्री रमेश पोखरियाल मंदिर में धरने पर भी बैठे। लेकिन इसके बाद भी मंदिर के मूल स्थान से मां धारी देवी की मूर्ति को अपलिफ्ट किया गया, जिसका दु:ख आज तक उमा भारती को होता है।
220 से 330 मेगावाट की गई परियोजना
श्रीनगर जलविद्युत परियोजना को वर्ष 2004 में जीवीके कंपनी ने डेकन कंपनी से लिया था। तब इसके निर्माण को 220 मेगावाट रखा गया था, लेकिन बाद में इस परियोजना को बढ़ाते हुए 330 मेगावाट किया गया। जिसके चलते नदी की झील का फैलाव और गहराई भी बढ़ी। श्रीनगर जलविद्युत परियोजना से वर्ष 2015 से लगातार बिजली उत्पादन हो रहा है।