उत्तराखंड परिवहन विभाग मिनिस्टीरियल कर्मचारी संघ की प्रदेश अध्यक्ष सुषमा चौधरी का कहना है कि शासनादेश में संशोधन व कर्मचारियों को पदोन्नति दिए जाने की मांग उठायी जा रही है, लेकिन आला अधिकारी मांगो को लेकर कतई गंभीर नही हैं।
पदोन्नति के साथ ही पूर्व में जारी किए गए शासनादेश में त्रुटियों को संशोधित किए जाने और नया शासनादेश जारी करने की मांग को लेकर परिवहन विभाग मिनिस्टीरियल कर्मचारी संघ के पदाधिकारी व कर्मचारियों ने सोमवार को परिवहन मुख्यालय का घेराव किया। कर्मचारी मुख्यालय में धरने पर बैठ गए।
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प्रदेश भर से संघ पदाधिकारी औ कर्मचारी देहरादून पहुंचे
परिवहन मुख्यालय के घेराव को लेकर प्रदेश भर से संघ पदाधिकारी, कर्मचारी देहरादून पहुंचे। इतना ही नहीं संघ पदाधिकारियों ने परिवहन मुख्यालय घेराव को लेकर परिवहन आयुक्त को लिखित जानकारी भी दे दी। दूसरी ओर अपनी मांगों को लेकर कर्मचारियों का अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार छठवें दिन सोमवार को भी जारी रहा। आंदोलित कर्मचारियों ने एलान किया है कि जब तक उनकी मांगें स्वीकार नहीं की जाती हैं, अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार जारी रहेगा।
वहीं उत्तराखंड परिवहन विभाग मिनिस्टीरियल कर्मचारी संघ की प्रदेश अध्यक्ष सुषमा चौधरी का कहना है कि शासनादेश में संशोधन व कर्मचारियों को पदोन्नति दिए जाने की मांग उठायी जा रही है, लेकिन सरकार व शासन में बैठे आला अधिकारी मांगों को लेकर कतई गंभीर नही हैं। गलत तरीके से शासनादेश जारी किया गया है, जिसका सीधा असर कर्मचारियों की पदोन्नति पर पड़ रहा है। पदाधिकारियों ने कहा कि विभागीय कार्यों में उत्तरोत्तर वृद्धि के चलते साल 2020 में विभागीय ढांचे का पुनर्गठन किया गया था।
प्रशासनिक अधिकारियों के पदों को त्रुटिपूर्ण कम दर्शाया गया
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पुनर्गठन आदेश में मिनिस्टीरियल संवर्ग के 36 नए पदों का स्वीकृत किया गया था, लेकिन संबंधित शासनादेश में पूर्व में स्वीकृत वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के पदों को त्रुटिपूर्ण तरीके से कम दर्शाया गया। जिसकी वजह से लंबी सेवा के बावजूद कर्मचारियों की पदोन्नति नहीं हो पा रही है। ऐसे में आंदोलन के अलावा दूसरा कोई विकल्प नहीं है। वहीं परिवहन आयुक्त कार्यालय के घेराव को लेकर संघ के प्रदेश स्तरीय पदाधिकारियों के अलावा जिलाध्यक्ष समेत तमाम पदाधिकारी और कर्मचारी देहरादून पहुंचे हैं।