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उत्तराखंड: 154.58 किलोमीटर की टनकपुर-बागेश्वर रेल लाइन के फाइनल लोकेशन सर्वे को मंजूरी

Tue, 12 Oct 2021 10:05 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून/हल्द्वानी

सार

पिछले दिनों मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इसे लेकर केंद्रीय रेल मंत्री से मुलाकात की थी। इसके फाइनल लोकेशन सर्वे के लिए 28 करोड़ 95 लाख रुपये के बजट को मंत्रालय ने स्वीकृति दी है।
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रेल लाइन - फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर
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विस्तार
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रेल मंत्रालय ने टनकपुर-बागेश्वर नई ब्रॉडगेज रेल लाइन के फाइनल लोकेशन सर्वे को मंजूरी दे दी है। इस पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय रेल मंत्री अश्वनी वैष्णव का आभार जताया।

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टनकपुर-बागेश्वर रेल लाइन 154.58 किलोमीटर की है। पिछले दिनों मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इसे लेकर केंद्रीय रेल मंत्री से मुलाकात की थी। इसके फाइनल लोकेशन सर्वे के लिए 28 करोड़ 95 लाख रुपये के बजट को मंत्रालय ने स्वीकृति दी है। मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि रेल लाइन बनने से क्षेत्र में विकासात्मक गतिविधियां बढे़ंगी।

लोगों को काफी सुविधा मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उत्तराखंड से विशेष लगाव है। उनके कार्यकाल में प्रदेश में तमाम विकास कार्य हुए हैं। विशेष तौर पर कनेक्टिविटी के क्षेत्र में चारधाम सड़क परियोजना, ऋषिकेश कर्णप्रयाग रेल परियोजना, एयर कनेक्टिविटी में ऐतिहासिक काम हुए हैं या चल रहे हैं। इससे आने वाले समय में प्रदेश की आर्थिकी में क्रांतिकारी परिवर्तन आएंगे।

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एक सदी से सर्वे के फेर में फंसी रही टनकपुर-बागेश्वर रेललाइन

बागेश्वर रेललाइन 109 साल से सर्वे में ही उलझी है। एक सदी की लंबी अवधि के दौरान 24 फरवरी 1960 को पिथौरागढ़, 15 सितंबर 1997 को बागेश्वर और चंपावत अल्मोड़ा से अलग होकर जिले बन गए लेकिन 109 वर्ष बीतने के बाद भी रेल लाइन एक सपना ही है। तीन जिलों को जोड़ने वाली सामरिक महत्व की यह प्रस्तावित रेल लाइन सर्वे तक ही अटक कर रह गई है। नवंबर 2020 में दूसरी बार रेल लाइन के लिए रेल मंत्रालय ने सर्वे कराया। 

वर्ष 1911-12 में अंग्रेजी हुकूमत ने टनकपुर-बागेश्वर रेल लाइन का सर्वे कराया था। रेल लाइन निर्माण का खाका अंग्रेज तैयार कर रहे थे कि आजादी की ज्वाला और तेज भड़कने लगी। अंग्रेज बागेश्वर तक रेल नहीं पहुंचा पाए। देश की आजादी के बाद बागेश्वर के लोगों ने रेल लाइन के निर्माण की मांग उठानी शुरू कर दी थी। 80 के दशक में यह मांग परवान चढ़ी। बागेश्वर से लेकर पिथौरागढ़, चंपावत इलाके के लोग रेल लाइन निर्माण की मांग को लेकर लामबंद होने लगे। जनांदोलनों के पुरोधा बागेश्वर निवासी गुसाईं सिंह दफौटी के नेतृत्व में हुए आंदोलन ने शासकों की चूलें हिला दी थीं। आंदोलन ने सत्ताधारी दल के साथ ही विपक्षी दलों को भी आंदोलन का समर्थन करने के लिए मजबूर कर दिया।

जन दबाव में राजनीतिक दल बागेश्वर-टनकपुर रेल लाइन को चुनावी वादों में शामिल करने लगे। बागेश्वर के लोगों का संघर्ष चलता रहा। वर्ष 2006-07 में रेलवे मंत्रालय ने टनकपुर-बागेश्वर रेल लाइन का प्रारंभिक सर्वे कराया। वर्ष 2015-16 में इस परियोजना को राष्ट्रीय महत्व की परियोजना में शामिल किया गया। वर्ष 2019-20 में फाइनल सर्वे कराया गया। 9 नवंबर 2020 को इज्जतनगर मंडल ने सर्वे रिपोर्ट रेलवे बोर्ड को भेज दी।  अब फाइनल लोकेशन सर्वे के लिए केंद्र से मंजूरी मिलने के बाद बागेश्वर रेललाइन के सपनों को एक बार फिर पंख लग गए हैं। 
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154.58 किमी लंबी लाइन में 53.44 किमी टनलों से गुजरेगी ट्रेन

प्रस्तावित टनकपुर-बागेश्वर रेल लाइन 54.58 किमी लंबी होगी। रेलवे लाइन बिछाने के लिए 72 टनल बनाए जाएंगे। सबसे बड़ा टनल 4.75 किमी का होगा। सभी टनलों की लंबाई 53.44 किमी होगी। 154.58 किमी लंबी रेल लाइन में 53.44 किमी का सफर सुरंगों से होगा।

13 क्रॉसिंग स्टेशन, एक टर्मिनल बनेगा
सर्वे के अनुसार टनकपुर-बागेश्वर रेल लाइन में 13 क्रॉसिंग स्टेशन और एक टर्मिनल बनाया जाएगा। क्रॉसिंग स्टेशन टनकपुर, पूर्णागिरि रोड, कालढूंगा, पोलाबन, चिनार, पंचेश्वर, कारीघात, विरकोला, नयाल, सल्यूट, जमनी, तालखोली और बागेश्वर में बनेंगे।
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