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चंपावत: स्वामी विवेकानंद की विरासत पर चला हथौड़ा, अब डाकबंगले की जह बनेगा ध्यान केंद्र 

Thu, 09 Sep 2021 06:06 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंपावत

सार

Swami Vivekananda News: स्वामी जी की स्मृति से जुड़ा डाकबंगला यहां से 25 किमी दूर दियूरी में है, जहां इस बंगले में स्वामी जी 19 जनवरी 1901 को रात में रुके थे। 
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स्वामी विवेकानंद की विरासत पर चला हथौड़ा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सात समंदर पार वर्ष 1893 में शिकागो धर्म सम्मेलन से आध्यात्मिक पताका फहराने वाले महापुरुष स्वामी विवेकानंद का दुनियाभर में डंका है। स्वामी विवेकानंद का इस जिले से भी ताल्लुक रहा है, लेकिन उनकी विरासत से जुड़े स्थानों और भवनों का कोई सुधलेवा नहीं है। अब तो स्वामी विवेकानंद की स्मृतियों को सहेजने वाले चंपावत में बने दियूरी के डाकबंगले पर भी हथौड़ा चल गया है। इस जीर्णशीर्ण डाकबंगले का उपयोग दो दशक से यदाकदा ही मजदूरों के रहने के लिए होता था, लेकिन अब वहां ध्यान केंद्र बनेगा।  

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स्वामी विवेकानंद की स्मृति से जुड़ा डाकबंगला यहां से 25 किमी दूर दियूरी में है, जहां इस बंगले में स्वामी विवेकानंद 19 जनवरी 1901 को रात में रुके थे। स्वामी विवेकानंद से जुड़े साहित्य में इस बात का उल्लेख है कि चंपावत से स्वामी विवेकानंद को डोली से दियूरी ले जाया गया था।

डाक बंगले में स्वामी विवेकानंद और उनके साथियों (गुरु भाई और श्रीरामकृष्ण देव के दूसरे शिष्य स्वामी सदानंद और स्वामी विरजानंद के अलावा अल्मोड़ा के लाला गोविंद लाल शाह) ने घी और भात खाया। पूर्व प्रधान पूरन सिंह, दीपक नेगी आदि ग्रामीण कहते हैं कि स्वामी विवेकानंद के यहां रात बिताने की जानकारी उनके बड़े-बुजुर्ग भी बताते थे। दो कक्ष वाले इस जीर्णशीर्ण बंगले को अब ध्वस्त कर दिया गया है। अब इस जगह का उपयोग ध्यान केंद्र बनाने के लिए किया जाएगा। 

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दियूरी था पैदल यात्रियों का पड़ाव 

टनकपुर-अस्कोट पैदल मार्ग पर स्थित दियूरी कभी पैदल यात्रियों का अहम पड़ाव भी होता था। 18वीं सदी के आखिर में बना दियूरी डाक बंगला लंबे समय तक पैदल आवाजाही करने वालों के लिए विश्रामगृह का भी काम करता था। इसके रखरखाव को लेकर कभी किसी ने पहल नहीं की। अब यह डाकबंगला ही इतिहास बन गया। 

स्मृति स्तंभ भी बदहाल 
स्वामी विवेकानंद के प्रवास के 100 साल पूरे होने पर 2001 में चंपावत में स्मृति स्तंभ बनाया गया था। यह स्तंभ स्वामी विवेकानंद के चंपावत के प्रवास को चिर अक्षुण्ण रखने के लिए उनके विश्रामस्थल में बनाया गया था, लेकिन इस स्मृति स्तंभ के हाल भी ठीक नहीं है। जिला पंचायत के स्वामित्व वाले स्मृति स्तंभ वाली जगह में 18 जनवरी 1901 को स्वामी विवेकानंद एक रात रुके थे।

दियूरी में स्वामी विवेकानंद के विश्रामगृह वाले भवन की हालत वर्षों से ठीक नहीं थे। अब अनुमोदन के बाद यहां 22 लाख रुपये से ध्यान केंद्र बनाने के लिए मंजूरी मिली है। ध्यान केंद्र के निर्माण में जगह कम होने से डाकबंगले के ढांचे को हटाना जरूरी था। ध्यान केंद्र को पर्वतीय शैली के हिसाब से बनाया जाएगा। 
- एमसी पांडेय, ईई, लोक निर्माण विभाग, चंपावत। 
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