टनकपुर-अस्कोट पैदल मार्ग पर स्थित दियूरी कभी पैदल यात्रियों का अहम पड़ाव भी होता था। 18वीं सदी के आखिर में बना दियूरी डाक बंगला लंबे समय तक पैदल आवाजाही करने वालों के लिए विश्रामगृह का भी काम करता था। इसके रखरखाव को लेकर कभी किसी ने पहल नहीं की। अब यह डाकबंगला ही इतिहास बन गया।
स्मृति स्तंभ भी बदहाल
स्वामी विवेकानंद के प्रवास के 100 साल पूरे होने पर 2001 में चंपावत में स्मृति स्तंभ बनाया गया था। यह स्तंभ स्वामी विवेकानंद के चंपावत के प्रवास को चिर अक्षुण्ण रखने के लिए उनके विश्रामस्थल में बनाया गया था, लेकिन इस स्मृति स्तंभ के हाल भी ठीक नहीं है। जिला पंचायत के स्वामित्व वाले स्मृति स्तंभ वाली जगह में 18 जनवरी 1901 को स्वामी विवेकानंद एक रात रुके थे।
दियूरी में स्वामी विवेकानंद के विश्रामगृह वाले भवन की हालत वर्षों से ठीक नहीं थे। अब अनुमोदन के बाद यहां 22 लाख रुपये से ध्यान केंद्र बनाने के लिए मंजूरी मिली है। ध्यान केंद्र के निर्माण में जगह कम होने से डाकबंगले के ढांचे को हटाना जरूरी था। ध्यान केंद्र को पर्वतीय शैली के हिसाब से बनाया जाएगा।
- एमसी पांडेय, ईई, लोक निर्माण विभाग, चंपावत।