एक था गांव फिल्म मजबूरी में गांव छोड़ चुके लोगों की कहानी पर आधारित है। फिल्म बताती है कि गांव से जाने के बाद भी लोगों के मन में लौटने की कशमकश चलती रहती है। फिल्म के मुख्य दो पात्र हैं। 80 वर्षीय लीला देवी और 19 वर्षीय किशोरी गोलू। लीला देवी अकेली रहती है।
इकलौती बेटी की शादी हो चुकी है। बेटी साथ में देहरादून चलने के लिए जिद करती है लेकिन लीला हर बार मना कर देती हैं। वह गांव नहीं छोड़ना चाहती हैं क्योंकि उन्हें गांव का जीवन अच्छा लगता है। हालांकि गांव का जीवन बहुत कठिन है।
वहीं दूसरी पात्र गोलू को गांव के जीवन में भविष्य नहीं दिखता है। वह भी अन्य लड़कियों की तरह अपने पैरों पर खड़ा होना चाहती है। एक दिन ऐसी परिस्थिति आती है कि दोनों को गांव छोड़ना पड़ता है। लीला देवी अपनी बेटी के पास देहरादून चली जाती हैं जबकि गोलू उच्च शिक्षा के लिए ऋषिकेश चली जाती है। फिल्म के माध्यम से बताया गया कि अपनी जन्मभूमि को छोड़ने का कोई न कोई कारण होता है लेकिन गांव छोड़ने के बाद भी लोगों के मन में गांव लौटने की कशमकश चलती रहती है।