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उत्तराखंड : पिज्जा, बर्गर को सेहतमंद बना ढूंढी रोजगार की राह, यहां मडुवे से तैयार होते हैं फास्ट फूड

Fri, 11 Jun 2021 04:17 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal अजय कुमार, अमर उजाला, उत्तरकाशी

सार

न्यू गांव निवासी जसवीर (28) ने वर्ष 2018 में स्वरोजगार की दिशा में कदम बढ़ाकर कैफे की शुरूआत की थी। लेकिन यहां तक का सफर उनके लिए आसान नहीं था।
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जसवीर सिंह असवाल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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आपने अक्सर मैदा से बने पिज्जा, बर्गर जैसे फास्ट फूड के नुकसान सुने होंगे। न्यू गांव के जसवीर सिंह असवाल ने इसी पिज्जा, बर्गर को सेहतमंद बनाकर अपने लिए रोजगार की राह तैयार कर ली।

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जसवीर सिंह के कैफे में मंडुवे से बने पिज्जा और बर्गर लोगों को खूब पसंद आ रहे हैं। वहीं, जसवीर के इस स्टार्टअप ने कई और युवाओं को स्वरोजगार की राह दिखाई है। उन्होंने अपने कैफे में सात और युवाओं को रोजगार भी दिया है।

विकासखंड डुंडा की गाजणा पट्टी के न्यू गांव निवासी जसवीर (28) ने 2018 में स्वरोजगार की दिशा में कदम बढ़ाकर कैफे की शुरूआत की थी। लेकिन यहां तक का सफर उनके लिए आसान नहीं था। दून के डीएवी कॉलेज से बीएससी की पढ़ाई करने वाले जसवीर बताते हैं कि कॉलेज के साथ उन्होंने दून में ही 30 से 40 रेस्टोरेंट व होटलों में वेटर का काम किया।
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मौका मिलने पर बेकरी आदि का काम सीखा। एमएससी की पढ़ाई के दौरान उन्हें खुद का व्यवसाय शुरू करने का विचार आया। लेकिन उसके लिए धन की कमी आड़े आ गई। तब तत्कालीन डीएम आशीष चौहान ने उन्हें ऋण दिलाने में मदद की।

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सेहत के लिए मैदा को अच्छा नहीं

बैंक से आठ लाख रुपये ऋण लेकर उन्होंने कैफे शुरू किया। सेहत के लिए मैदा को अच्छा नहीं माना जाता। इसी बात में जसवीर को रोजगार का आइडिया नजर आया। उन्होंने मैदा के बजाय मंडुवे से पिज्जा और बर्गर जैसे फास्ट फूड बनाने शुरू किए। वहीं, रविवार के दिन उनके कैफे में शहद के साथ मंडुवे की रोटी परोसी जाती है, जिसे लोग शौक से खाते हैं।

कैफे में नहीं कोई नौकर, कर्मचारी, सब बराबर
जसवीर के कैफे में सात और युवक काम करते हैं। जसवीर का कहना है कि उनके कैफे में नौकर-मालिक की भावना नहीं है। सभी कैफे की ड्रेस में रहते हैं। इन युवाओं को कुल आमदनी में से पूरी हिस्सेदारी दी जाती है। कैफे में जब मर्जी आओ, जब मर्जी जाओ के साथ काम करने की पूरी आजादी है। बताया कि प्रतिमाह 90 हजार रुपये की आमदनी के साथ सालाना 10.80 लाख रुपये तक कमाई हो जाती है।
 
कोविड में होम डिलीवरी ने संभाला
जसवीर का कैफ पूरे शहर में होम डिलीवरी सुविधा देता है। जसवीर बताते हैं कि पिछले साल लॉकडाउन से काम पर फर्क पड़ा था। लेकिन फिर होम डिलीवरी पर फोकस करने से काफी मदद मिली। बताया कि वह शहर के साथ गंगोरी, नेताला, तेखला व मातली तक होम डिलीवरी करते हैं।
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