उच्च शिक्षा में इसी महीने से नया शिक्षा सत्र शुरू हो गया। इसके बावजूद महाविद्यालयों में दोहरी व्यवस्था बनी हुई है। इससे छात्र परेशान हैं। प्रदेश के कुछ महाविद्यालयों में सेमेस्टर सिस्टम लागू है तो अधिकतर में वार्षिक प्रणाली है। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक एक विभाग में एक ही सिस्टम लागू होना चाहिए। सभी महाविद्यालयों में समान रूप से सेमेस्टर सिस्टम लागू किया जाना चाहिए। इससे महाविद्यालयों में पढ़ाई का माहौल देखने को मिलता।
प्रदेश के 106 सरकारी महाविद्यालयों में पूर्व में स्नातक स्तर पर सेमेस्टर सिस्टम लागू था, लेकिन नवंबर 2019 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के छात्र-छात्राओं के विरोध के चलते शासन ने सेमेस्टर सिस्टम को बंद कर वार्षिक प्रणाली लागू किए जाने का आदेश किया। शासन की ओर से जारी आदेश में कहा गया कि कुमाऊं विश्वविद्यालय के तीनों परिसरों, दून विश्वविद्यालय और श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय के ऋषिकेश परिसर में सेमेस्टर सिस्टम से परीक्षाएं होंगी। जबकि अन्य सभी महाविद्यालयों में वार्षिक प्रणाली लागू की जाएगी। शासन के आदेश के बाद प्रदेश के अधिकतर महाविद्यालयों में वार्षिक प्रणाली लागू है। नई शिक्षा नीति के आने के बाद नए शिक्षा सत्र से सभी महाविद्यालयों में सेमेस्टर सिस्टम लागू होने की संभावना जताई जा रही थी, लेकिन विभाग में अब भी दोहरी व्यवस्था है।
कुमाऊं मंडल में करीब 12 महाविद्यालयों में सेमेस्टर सिस्टम है। जबकि अन्य में वार्षिक प्रणाली लागू है। इसी तरह गढ़वाल मंडल के अधिकतर महाविद्यालयों में वार्षिक प्रणाली लागू है। भविष्य में सभी महाविद्यालयों में सेमेस्टर सिस्टम लागू होगा। जो छात्रहित में है।
- डॉ. पीके पाठक, उच्च शिक्षा निदेशक