राज्य सरकार के कर्मचारियों की जोर पकड़ रही पुरानी एसीपी (अश्योर्ड कैरियर प्रमोशन) की मांग से वित्त विभाग चिंतित है। उसकी चिंता की वजह अगले 10 साल में वेतन और पेंशन के खर्च के अनुमान है।
सरकार के सामने एमएसीपी लागू होने के बाद पुलिस के सिपाहियों के ग्रेड वेतन की पहेली सुलझाने की चुनौती है। मंत्रिमंडलीय उपसमिति अभी माथापच्ची में जुटी है और सरकार ने इसके लिए एक वेतन विसंगति समिति भी बना दी है।
माना जा रहा है कि पुलिस के सिपाहियों की इस मांग पर विभिन्न विभागों में 23 पदों पर तैनात कर्मचारियों की भी निगाह लगी है। इसलिए राज्य के 17022 पुलिस के सिपाहियों के ग्रेड वेतन का मामला सुलझाने के लिए प्रदेश सरकार को कोई और तरकीब तलाशनी पड़ सकती है। एक जनवरी 2017 से लागू एमएसीपी की व्यवस्था लागू होने से केवल पुलिस के सिपाहियों का ही ग्रेड वेतन कम नहीं हुआ है। विभिन्न विभागों के 23 पदों पर तैनात करीब 15221 कर्मचारियों का भी यही दर्द है। वित्त विभाग ने अनुमान लगाया है कि यदि उसे पुरानी एसपीपी की तरह पदोन्नति के पद पर वेतनमान देना पड़ा तो अगले 10 वर्षों में वेतन और पेंशन के खर्च का पहाड़ खड़ा हो जाएगा। यही वजह है कि सरकार ग्रेड वेतन पर फैसला लेने से हिचक रही है।
वर्तमान बजट से अधिक हो जाएगा वेतन-पेंशन का खर्च
वित्तीय वर्ष 2021-22 का बजट अनुमान 57400 करोड़ का है। यदि सरकार सभी कर्मचारियों की मांग पूरी करती है तो मौजूदा वित्तीय वर्ष में वेतन और पेंशन का खर्च बढ़कर करीब 21 हजार करोड़ पहुंच जाएगा। 10 साल में यह खर्च बढ़कर मौजूदा बजट से भी अधिक 60 हजार करोड़ तक पहुंच जाएगा।
एमएसीपी का अगला स्तर प्रमोशन के पद पर वेतनमान देने से खर्च का अनुमान
वर्ष - वेतन - पुरानी पेंशन - नई पेंशन
2021-22 -15335 - 4897 - 949
2022-23 -17198 - 5552 - 1062
2023-24 - 19261 - 6266 - 1190
2024-25 - 21573 - 7044 - 1333
2025-26- 24161 - 7852 - 1493
2026-27- 31893 - 8986 - 1672
2027-28- 35720 - 10178 - 1873
2028-29 - 40007 - 11478 - 2098
2029-30 - 44807 - 12895 - 2350
इन पदों पर तैनात कर्मचारियों को हुआ घाटा
माना जा रहा है कि एक जनवरी 2017 से लागू एमएसीपी की व्यवस्था से 23 पदों पर तैनात 32 हजार 243 कर्मचारियों को घाटा हुआ है। पुरानी एसीपी में उन्हें 4600 और 3800, 5400 ग्रेड पे तक फायदा हो रहा था। इनमें पुलिस कांस्टेबल, सचिवालय व विधानसभा के रक्षक, वन आरक्षी, आबकारी सिपाही, प्रवर्तन सिपाही, ग्राम पंचायत अधिकारी, ग्राम विकास अधिकारी, कनिष्ठ अभियंता (लोनिवि, कृषि, ग्रामीण निर्माण, सिंचाई, लघु सिंचाई), फार्मेसिस्ट, कंप्यूटर आपरेटर (सचिवालय), सहायक लेखाकार (कोषागार), नायब तहसीलदार, संग्रह अमीन, चकबंदीकर्ता, हवलदार प्रशिक्षक, सहायक शोध अधिकारी (नियोजन), टंकक (लोकसेवा आयोग), फायरमैन, बंदी रक्षक, पर्यवेक्षक (उद्यान), जड़ीबूटी पर्यवेक्षक (भेषज), स्वास्थ्य कार्यकर्ता (महिला) आदि हैं।
सरकार की अब तक की कवायद
चुनावी साल में कर्मचारी संगठनों की पुरानी एसीपी लागू करने और वेतन विसंगति की मांग के जोर पकड़ने पर प्रदेश सरकार ने वेतन विसंगति समिति का गठन किया। पुलिस ग्रेड पे का मसला मंत्रिमंडलीय उपसमिति के पास है। उपसमिति अभी माथाच्ची में उलझी है। उपसमिति के अध्यक्ष कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल का कहना है कि सरकार की मंशा समाधान की है और एक बैठक और करनी होगी। समाधान बीच का रास्ता भी हो सकता है। ढांचे में नया पद शामिल कर विसंगति को दूर करने की चर्चाएं भी हैं।
वित्त विभाग के खर्च के अनुमान
159740 राज्य कर्मचारी हैं प्रदेश सरकार में
113805 कर्मचारी एसीपी/ एमएएसीपी लागू
1200 करोड़ वेतन पर हर महीने हो रहा खर्च
20 प्रतिशत वेतन में बढ़ोतरी होगी मांग मानने पर
12 प्रतिशत बढ़ोतरी डीए व वार्षिक वेतन वृद्धि देने से होगी
20 प्रतिशत वेतन बढ़ने का अनुमान है आठवें वेतन लागू होने पर
पेंशन खर्च बढ़ोतरी का अनुमान
-4296 करोड़ खर्च हो रहे हैं पेंशन पर हर साल
-744 करोड़ हर साल खर्च हो रहे हैं नई पेंशन पर