उत्तराखंड के जिला कारागार में तैनात बंदी रक्षकों में ग्रेड पे को लेकर आक्रोश पनप रहा है। ग्रेड पे न बढ़ाए जाने से नाराज बंदी रक्षक नौकरी छोड़कर फॉरेस्ट गार्ड और परिवहन विभाग के प्रवर्तन विभाग में सिपाही की नौकरी कर रहे हैं। हरिद्वार में 10 और प्रदेश भर में 70 से ज्यादा लोगों ने नौकरी छोड़ दी है। कई बंदी रक्षक प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी में जुटे हैं।
प्रदेश भर की जेलों में तैनात बंदी रक्षकों ने ग्रेड पे को लेकर आवाज उठानी शुरू कर दी है। उनके परिजन भी जल्द इस मुद्दे पर सरकार पर दबाव बनाने की तैयारी में हैं। बंदी रक्षकों का कहना है कि उत्तराखंड पुलिस से लेकर अन्य सभी वर्दीधारी विभागों का प्रारंभिक ग्रेड पे वेतन 2000 हजार रुपये है, जबकि बंदी रक्षकों का ग्रेड पे 1900 रुपये ही है। प्रदेश भर की जेलों में 500 के करीब बंदी रक्षकों की तैनाती है। ग्रेड पे में विसंगति को लेकर उनमें आक्रोश बढ़ रहा है।
वे अब बंदी रक्षक की नौकरी छोड़ने लगे हैं। प्रदेश भर में अब तक 70 और हरिद्वार में 10 बंदी रक्षक नौकरी छोड़कर फोरेस्ट गार्ड, आबकारी आरक्षी, शिक्षक, प्रवर्तन चालक, डिस्पैच चालक और सचिवालय रक्षक की नौकरी में जा चुके हैं।
छह माह का होता है प्रशिक्षण
बंदी रक्षकों को छह माह का प्रशिक्षण दिया जाता है। प्रशिक्षण के दौरान हजारों रुपये का खर्चा एक बंदी रक्षक को तैयार करने में आता है।
धुलाई भत्ता भी दिया जा रहा कम
बंदी रक्षकों को कारागार विभाग से 15 एवं 20 रुपये धुलाई भत्ता प्रतिमाह दिया जा रहा है, जबकि पुलिस विभाग में न्यूनतम 250 रुपये धुलाई भत्ता दिया जा रहा है।
पौष्टिक भत्ते की भी हो रही मांग
कारागार अति संवेदनशील विभाग है। इसमें अपराधियों केे अनुशासित रखने के लिए स्टाफ का स्वस्थ रहना आवश्यक है। कारागार बंदी रक्षकों को सप्ताह के सातों दिन, 24 घंटे और साल की 365 दिन ड्यूटी होती है। कारागार बंदी रक्षकों की मांग है कि उन्हें भी पुलिस व वन कर्मियों की भांति पौष्टिक भत्ता दिया जाए।
किसको कितना मिलता है ग्रेड पे व शैक्षिक योग्यता
पद शैक्षिक योग्यता ग्रेड-पे
उत्तराखंड पुलिस 12वीं 2 हजार
वनरक्षक 12वीं 2 हजार
सचिवालय रक्षक 12वीं 2 हजार
आबकारी आरक्षी 12वीं 2 हजार
डिस्पैच चालक 10वीं 2 हजार
वाहन चालक, प्रवर्तन चालक 8वीं 2 हजार
बंदी रक्षक 12वीं 1900 रुपये
प्रदेश भर की जेलों में 70 और हरिद्वार में 10 से अधिक बंदी रक्षक नौकरी छोड़ चुुके हैं। जेलों में कार्यरत बंदियों का कार्य चुनौतीपूर्ण है। उनकी मांग है कि उनका ग्रेड पे भी अन्य वर्दीधारियों के समकक्ष किया जाए।
-आरसी गैरोला, प्रांतीय महामंत्री, उत्तराखंड जेल एसोसिएशन