यदि कोई किसी का जबरन या गलत ढंग से बातें बताकर धर्मांतरण करता है तो मौजूदा कानून के अनुसार उसके परिजन पहले कोर्ट में वाद दायर करते हैं। इसके लिए जरूरी है कि शिकायत करने वाला व्यक्ति सगा संबंधी हो, लेकिन प्रस्ताव में ऐसे मामलों में परिजन सीधे थानों में एफआईआर करा सकें इसकी सिफारिश की गई है। इस अपराध को संज्ञेय अपराधों की श्रेणी में रखने का भी प्रस्ताव है।
कम से कम 15 हजार रुपये जुर्माना
धर्मांतरण कराने वालों पर मौजूदा कानून में जुर्माने की रकम को नहीं खोला गया है। पुलिस मुख्यालय ने जुर्माने की रकम को कम से कम 15 हजार रुपये करने का प्रस्ताव भेजा है। साथ ही अनुसूचित जाति, जनजाति की महिलाओं व व्यक्ति का धर्मांतरण कराने पर मौजूदा कानून के तहत मात्र दो से सात साल की सजा दी जा सकती है। जबकि, यदि प्रस्तावित संशोधन होता है तो उसके लिए 10 वर्ष तक सजा और 25 हजार रुपये जुर्माना का प्रावधान होगा। प्रस्ताव के अनुसार सामूहिक धर्म परिवर्तन कराने वालों को सजा तीन साल से कम नहीं होगी और अधिकतम 10 साल हो सकती है।
ये भी हैं प्रस्ताव
- मुकदमों का ट्रायल परिवार न्यायालयों में होता है, लेकिन मुख्यालय ने मुकदमों का सत्र न्यायालय में कराए जाने का प्रस्ताव भेजा है।
- स्वयं कोई धर्मांतरण करना चाहता है तो इसके लिए जिलाधिकारी को एक माह पहले सूचना देनी होती है। ऐसा न करने पर मुकदमे के लिए जिलाधिकारी की पूर्व स्वीकृति जरूरी है, लेकिन प्रस्ताव के अनुसार डीएम की पूर्व स्वीकृति को खत्म किया जाए।
- यदि कोई संगठन या संस्था धर्मांतरण कराने में लिप्त है तो उसके लिए दंड का प्रावधान है। इसमें मुख्यालय ने प्रस्ताव दिया है कि ऐसी संस्थाओं की वित्तीय सहायता पर रोक लगाना उचित होगा।
पिछले दिनों मुख्यमंत्री ने धार्मिक स्वतंत्रता कानून को कड़ा बनाने के लिए प्रस्ताव मांगे थे। इसी क्रम में कुछ महत्वपूर्ण प्रस्ताव शासन को भेजे गए हैं। अभी तक यह कानून बेहद हल्का है। यदि इन प्रस्तावों को मंजूरी मिलती है तो बड़ा बदलाव होगा।
- अशोक कुमार, डीजीपी