सर्दी और गर्मी के बीच के खूबसूरत मौसम में मनाए जाने वाले फूलदेई त्योहार में मुस्कुराते बच्चे फ्यंली, बुरांश और बासिंग के पीले, लाल, सफेद फूल घर की देहरी पर सजाते हैं। फूलदेई उत्तराखंड का विशेष लोक पर्व है। ज्योतिषाचार्य पंडित विष्णु प्रसाद भट्ट और आचार्य सुशांत राज ने बताया कि रविवार से चैत महीने की शुरुआत हो रही है।
चैत में प्रदेशभर में फूलों की चादर बिछी रहती है। बच्चे टोकरी में खेतों से फूल लेकर आते हैं और सुबह-सुबह घरों की देहरी पर रख जाते हैं। माना जाता है कि घर की देहरी पर फूल रखने से ईश्वर प्रसन्न होते हैं। इस पर्व की झलक लोक गीतों में भी देखने को मिलती है।
‘बदलते वक्त के साथ जिंदा है परंपरा’
अखण्डवानी भिलंग, रायपुर के जूनियर हाईस्कूल में शनिवार को फूलदेई का त्योहार मनाया गया। इसमें बच्चों ने खेत से फूल चुनकर स्कूल की देहरी पर सजाए। स्कूल के प्रधानाध्यापक सतीश घिल्डियाल ने कहा कि उत्तराखंड का प्रमुख त्योहार फूलदेई बदलते वक्त के साथ परंपरा को जिंदा रखे हुए है। बच्चों के द्वारा देहरी पर फूल रखने से ईश्वर प्रसन्न होकर व्यक्ति की मनोकामना पूरी करते हैं। उन्होंने बताया कि फूलदेई के मौके पर सीएम आवास में होने वाले कार्यक्रम में भी स्कूल के बच्चे भाग लेंगे।
उत्तराखंड से राज्यसभा सदस्य और भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया प्रमुख अनिल बलूनी ने नगरों और देश-विदेश में रह रहे प्रवासियों से फूलदेई त्योहार मनाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि रविवार को उत्तराखंड का महत्वपूर्ण लोकपर्व फूलदेई का त्योहार है।
यह पर्व पूरे पर्वतीय अंचलों में धूमधाम से मनाया जाता है, जो हमारे दिनचर्या, ऋतुओं और उसके वैज्ञानिक पक्ष से जुड़ा है। किसी भी समाज के विकास के लिए वहां के रीति रिवाज और लोकपर्वों का भी विशेष योगदान होता है।
बलूनी ने कहा कि इस शुभ पर्व पर हम भी अपने नौनिहालों से घर की देहरी पर पुष्प वर्षा कराएं और उन्हें शगुन तथा उपहार देकर इस त्यौहार को जीवंत बनाएं। पारंपरिक पकवानों का आनंद लें और सोशल मीडिया पर भी फूलदेई त्योहार मनाने के चित्रों को साझा भी करें।
सांसद बलूनी ने कहा कि अनेक संस्कृति के संरक्षक निरंतर लुप्त होते त्योहारों को मनाने और इनके संरक्षण के प्रयास करते रहे हैं। हमारे महान पूर्वजों ने निर्धारित सभी त्योहारों का समय, उनके मनाने के प्रतीक और प्रक्रिया पूर्ण रूप से हमारे परंपरागत जीवन की झलक देती है।
समय के साथ भले ही हमारी जीवन शैली में बदलाव आया है किंतु हमारे पर्व हमें अपने अतीत से जोड़ते हैं और हमें अपने महान संस्कृति का बोध कराते हैं। जिस तरह इगास के त्योहार को आप सभी ने देश-विदेश तक पहुंचाया और वहां रहने वाले उत्तराखंडी बंधुओं ने इगास/बूढ़ी दीवाली को एक वैश्विक की पहचान दी वह गौरवान्वित करने वाली है। इसी तरह फूलदेई के त्योहार को भी मनाकर उसे संरक्षित करने के अभियान में भागीदार बनें।
उत्तराखंड के लोकपर्व फूलदेई पर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. जेपी नड्डा ने शुभकामनाएं दी हैं। राज्यसभा सांसद और भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनिल बलूनी ने शाह और नड्डा का आभार जताया है। भाजपा के दोनों शीर्ष नेताओं ने सोशल मीडिया पर ट्वीट के माध्यम से फूलदेई त्योहार की शुभकामनाएं दीं।
बलूनी ने कहा कि फूलदेई का त्योहार संपूर्ण उत्तराखंड और प्रवासी उत्तराखंडियों ने प्रसन्नता और उल्लास के साथ मनाया। उन्होंने गृहमंत्री शाह और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नड्डा को ट्वीट करके उत्तराखंडवासियों को फूलदेई त्योहार की शुभकामनाएं देने पर आभार व्यक्त किया। बलूनी ने कहा कि हमारे लोकपर्व हमारे समाज की जीवंतता के उदाहरण हैं।
पलायन के कारण उत्तराखंड ही नहीं सभी अंचलों में पारंपरिक त्योहारों और रीति-रिवाजों पर असर पड़ा है। ऐसे में फूलदेई के प्रति इतना उल्लास संतोष देता है कि हमारी लोक संस्कृति और परंपराएं हमें अपनी जड़ों से जुड़े रहने की प्रेरणा देती है।
बलूनी ने कहा कि कुछ समय पूर्व उन्होंने उत्तराखंड के एक और प्रमुख त्योहार इगास को लेकर उसे मनाने के अभियान में भागीदारी की थी। हमारा प्रयास है कि देश-विदेश में रह रहे हमारे प्रवासी अपनी समृद्ध धरोहर को संरक्षित करें। हमारे पारंपरिक त्योहार, व्यंजन और रीति रिवाज हमारे महान पूर्वजों की जीवन शैली और उनकी मान्यताओं की झलक देते हैं।
बच्चों संग पूर्व मुख्यमंत्री ने मनाया फूलदेई त्योहार
पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने रविवार को पारंपरिक लोकपर्व फूलदेई त्योहार बच्चों के साथ मनाया। उन्होंने बच्चों को प्रकृति से जुड़े इस त्योहार की शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि यह बड़ी खुशी की बात है कि हमारे बच्चों में अपनी संस्कृति और परंपराओं से लगाव बना हुआ है। हमें अपनी प्राचीन संस्कृति को संजोकर रखने की जरूरत है। इसके लिए हम सबको मिलकर प्रयास करने होंगे।