ये है मान्यता
मान्यता है कि 8वीं सदी में आदि गुरु शंकराचार्य इस क्षेत्र में आए थे। उन्होंने अमर कल्प वृक्ष के नीचे तपस्या की थी, जिससे उन्हें दिव्य ज्ञान ज्योति की प्राप्ति हुई थी। दिव्य ज्ञान ज्योति और ज्योतेश्वर महादेव की वजह से इस स्थान को ज्योतिर्मठ का नाम दिया गया, लेकिन यह जोशीमठ के नाम से ही प्रचलित हो गया। इसके बाद नाम बदलने की मांग कई बार प्रमुखता से उठी, लेकिन इस पर अमल नहीं हो सका।
कोश्याकुटोली अब परगना श्री कैंचीधाम तहसील
नैनीताल की कोश्याकुटोली को अब परगना श्री कैंचीधाम तहसील के नाम से जाना जाएगा। केंद्र सरकार ने राज्य की ओर से भेजे गए तहसील नाम परिवर्तन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। क्षेत्रीय जनता और बाबा नीब करौरी महाराज के भक्तों ने सरकार के फैसले का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री धामी का आभार जताया। सीएम धामी ने बीते वर्ष कैंची धाम मंदिर के स्थापना दिवस (15 जून) के मौके पर कोश्याकुटोली तहसील को श्री कैंचीधाम के नाम पर करने की घोषणा की थी। इसके लिए केंद्र को प्रस्ताव भेजा गया था। केंद्र ने सभी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद कोश्याकुटोली तहसील का नाम बदलकर परगना श्री कैंचीधाम तहसील करने की मंजूरी दे दी। कैंची धाम को मानसखंड मंदिर माला मिशन में भी शामिल किया गया है।