टिहरी बांध के 415 से अधिक विस्थापित परिवारों के भूमि और मुआवजे के मामले सुलझाने के लिए केंद्रीय ऊर्जा सचिव की अध्यक्षता में कमेटी बना दी गई है। यह कमेटी टिहरी बांध परियोजना के साथ ही अन्य संबंधित पक्षों से बात करने के बाद दो माह के अंदर फैसला करेगी। शुक्रवार को दिल्ली में टिहरी बांध विस्थापितों सहित अन्य मुद्दों को लेकर उत्तराखंड के सिंचाई मंत्री और केंद्रीय ऊर्जा राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार राजकुमार सिंह के बीच बातचीत में यह सहमति बनी।
यह पहली बार है कि टिहरी बांध प्रभावितों के लिए मंत्रालयों के स्तर पर दिल्ली में बातचीत हुई। अभी तक अधिकारियों के स्तर पर ही बातचीत हो रही थी। सिंचाई मंत्री सतपाल महाराज के मुताबिक बैठक में अन्य कई मुद्दों को लेकर भी सहमति बनी है। यह तय किया गया है कि टिहरी बांध विकास निगम के अपने पास की जमीन को वापस करेगा।
इसके साथ ही निर्धन परिवारों के बच्चों को प्रशिक्षण दिया जाएगा और इनकी स्कूल फीस भी निगम के स्तर से वहन की जाएगी। झील क्षेत्र में सात बोट चलेंगी और दो स्कूल बसों का संचालन शुरू किया जाएगा। यह भी तय किया गया कि टिहरी बांध विकास निगम का मुख्यालय ऋषिकेश में ही रहेगा और इसको यहां से शिफ्ट नहीं किया जाएगा। टिहरी बांध विकास निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों की पदोन्नति और तबादलों के लिए भी नीति बनाई जाएगी।
टीएचडीसी वापस लेगा कोर्ट केस
बैठक का एक महत्वपूर्ण फैसला टिहरी बांध विकास निगम की और से समपाशर्विक या कोलेटरल डेमेज पॉलिसी के तहत कोर्ट में दायर वाद वापस लिया जाएगा। यह मामला 2010 में उठा था। टीएचडीसी ने बांध में अधिकतम ऊंचाई से भी अधिक झील में पानी भरा था और यह पानी छोड़ दिया था। झील का स्तर कम होने से तटीय क्षेत्रों में भूधंसाव से मामले सामने आए और लोगों को नुकसान उठाना पड़ा। इस नुकसान की भरपाई की मांग की गई तो निगम ने इंकार किया था।
निशुल्क पानी, सीवर की व्यवस्था देने को भी कमेटी गठित
अधिकारियों के मुताबिक टिहरी बांध प्रभावितों को आधे दाम पर बिजली और पानी तथा सीवर की व्यवस्था मुफ्त में देने के लिए भी कमेटी का गठन किया गया है।
सीआरआर फंड का भी होगा उपयोगा
बैठक में यह भी तय हुआ कि सिंदुल महाविद्यालय के भवन का निर्माण टीएचडीसी के सीआरआर फंड से किया जाएगा। यह पहली बार है कि टिहरी बांध विस्थापितों की समस्याओं के समाधान के लिए मंत्रालय के स्तर पर बैठक हुई और कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। केंद्रीय ऊर्जा राज्यमंत्री राजकुमार सिंह की तत्परता का फायदा बांध प्रभावितों को मिलेगा।