आयुर्वेद विश्वविद्यालय से जुड़े कॉलेजों में एडमिशन के लिए काउंसिलिंग शुरू हो चुकी है, लेकिन अब तक अधिकतर निजी कॉलेजों को आयुष मंत्रालय भारत सरकार से अनुमति नहीं मिली है। राज्य के सिर्फ एक ही आयुष कॉलेज को अनुमति मिल पाई है।
आयुर्वेद, यूनानी व होम्योपैथिक कॉलेजों में यूजी पाठ्यक्रम में दाखिले के लिए उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय 20 जनवरी से काउंसिलिंग प्रक्रिया शुरू कर चुका है। काउंसिलिंग 27 जनवरी तक चलेगी। आयुष कॉलेजों में दाखिला नीट के जरिए होता है। जिन छात्रों ने मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट क्वालिफाई की होगी, वही आयुष की काउंसिलिंग में हिस्सा ले सकते हैं।
राज्य कोटा की सीटों के लिए आयुर्वेद विश्वविद्यालय काउंसिलिंग करता है। उत्तराखंड में आयुर्वेद, यूनानी व होम्योपैथिक (आयुष) के अंतर्गत 16 निजी कॉलेज हैं। इनमें लगभग 450 सीटें आवंटित हैं। इनमें से अभी एकमात्र होम्योपैथी कॉलेज को ही इस बार मान्यता मिल पाई है। बाकी 15 कालेजों को काउंसिलिंग शुरू होने के बावजूद आयुष मंत्रालय भारत सरकार से मान्यता नहीं मिल पाई है। इससे निजी कॉलेजों में एडमिशन लेने के लिए छात्रों में असमंजस की स्थिति है।
काउंसिलिंग की तिथि बढ़ाने की मांग
एसोसिएशन ऑफ कंबाइंड एंट्रेंस एग्जामिनेशन के अध्यक्ष डॉ. एके काम्बोज ने बताया कि इस मुद्दे को लेकर एसोसिएशन की बैठक हुई है। पूरे मामले को लेकर आयुष मंत्रालय, भारत सरकार और उत्तराखंड आयुर्वेद विवि को अवगत कराया गया है। वर्ष 2020-21 के लिए आयुष मंत्रालय से निजी कॉलेजों को मान्यता न मिलने की वजह से आवंटित सीटों और प्रवेश को लेकर छात्रों में भ्रम की स्थिति है। विश्वविद्यालय से मांग की गई है कि काउंसिलिंग की प्रक्रिया को 10 दिन और बढ़ाया जाए। साथ ही मंत्रालय से मान्यता शीघ्र देने की मांग की गई है।
ऑनलाइन काउंसिलिंग चल रही है। इस मसले पर पत्र व्यवहार किया जा रहा है। 28 फरवरी प्रवेश की अंतिम तिथि है। सम्भवत: तब तक निजी कॉलेजों की मान्यता आ जाएगी।
- डॉ. सुनील जोशी, कुलपति, उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय