उत्तराखंड बनने के बाद राज्य में उत्तर प्रदेश जमींदारी विनाश एवं भूमि सुधार अधिनियम 1950 लागू किया गया। इसके बाद यहां इस कानून में समय-समय पर संशोधन हुए। उत्तराखंड में वर्ष 2002 में बाहरी व्यक्तियों के लिए भूमि खरीद की सीमा 500 वर्ग मीटर की गई। वर्ष 2007 में यह सीमा 250 वर्ग मीटर कर दी गई। लेकिन इसके बाद वर्ष 2018 में उत्तराखंड विधानसभा के शीतकालीन सत्र उत्तर प्रदेश जमींदारी विनाश एवं भूमि सुधार अधिनियम,1950 में संशोधन का विधेयक पारित करवाया गया।
इस संशोधन के तहत विधेयक में धारा 143 (क) जोड़ कर यह प्रावधान किया गया कि औद्योगिक प्रयोजन के लिए भूमिधर स्वयं भूमि बेचे या फिर उससे कोई भूमि क्रय करे तो इस भूमि को अकृषि करवाने के लिए अलग से कोई प्रक्रिया नहीं अपनानी पड़ेगी। औद्योगिक प्रयोजन के लिए खरीदे जाने पर उसका भू उपयोग स्वत: बादल जाएगा और वह-अकृषि या गैर कृषि हो जाएगा। इसके साथ ही उक्त अधिनियम में धारा 154 (2) जोड़ी गई। इससे पर्वतीय क्षेत्रों में भूमि खरीद की सीमा को औद्योगिक प्रयोजन के लिए पूरी तरह खत्म कर दिया गया। बाहरी लोगों ने राज्य में निवेश के नाम पर बेतहाशा जमीनें खरीद डालीं, लेकिन इन जमीनों पर आज तक उद्योगों की फसल खड़ी नहीं हुई।
उतराखंड में हिमाचल की तरह लागू हो भू कानून : हेमंत
फिल्म अभिनेता हेमंत पांडे ने उतराखंड में हिमाचल की तरह भू-कानून लागू करने की वकालत की है। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते भू-कानून लागू नहीं किया गया तो भविष्य में उतराखंड की स्थिति भी कश्मीर की तरह हो जाएगी। उन्होंने उतराखंड के युवाओं का आह्वान किया है कि वे राज्य में भू-कानून लागू करने के लिए दलगत राजनीति से हटकर और एकजुट होकर आवाज उठाएं।
फिल्म अभिनेता पांडे ने शुक्रवार को मुंबई से सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी किया। 4:15 मिनट के वीडियो में उन्होंने कहा कि राज्य के लिए भू-कानून बहुत जरूरी है। यदि ऐसा न हुआ तो आने वाली पीढ़ी के पास केवल उतराखंड का नाम ही रह जाएगा। उन्होंने कहा कि देश में पैसे वालों की कोई कमी नहीं है। वे चाहें तो देश, उतराखंड और यहां के नेताओं को भी खरीद सकते हैं। ऐसे में जरूरत है कि प्रत्येक व्यक्ति अपने आपको जगाए और भू-कानून का समर्थन करते हुए सरकार को इस कानून को लागू करने के लिए मजबूर करे।
पांडे ने कहा कि एक नई आजादी का आंदोलन हमें शुरू करना होगा और यह आंदोलन हमें अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए करना होगा। ऐसा नहीं है कि कोई बाहर का व्यक्ति यहां नहीं आए बल्कि आए ठीक वैसे ही जैसे हिमाचल में जाता है। हिमाचल की तर्ज पर ही यहां भूमि खरीद-फरोख्त के नियम-कानून बनें तभी यहां की जमीनें बच पाएंगी। उन्होंने कहा कि यहां के कुछ लोगों के साथ मिलकर पहाड़ के पहाड़ खरीदे जा रहे हैं। ऐसा ही चलता रहा तो उतराखंड का भविष्य भयंकर होने वाला है। पांडे का कहना है कि जब जनता सांसद और विधायक बना सकती है तो वह उतराखंड में भू-कानून लाने के लिए सरकार को बाध्य भी कर सकती है।