राष्ट्रीय दृष्टिविहिनता कार्यक्रम के तहत राजकीय महात्मा गांधी शताब्दी नेत्र चिकित्सालय देहरादून को आई कलेक्शनर सेंटर (नेत्र संकलन केंद्र) संचालित करने की मान्यता मिल गई है। एक नवंबर 2021 से यह सेंटर शुरू होगा। इससे नेत्र प्रत्यारोपण और नेत्र दान के क्षेत्र में विशेष लाभ मिलेगा।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की निदेशक डॉ. सरोज नैथानी ने बताया कि सरकार की ओर से गठित समिति के कॉर्निया तकनीकी विशेषज्ञ ने महात्मा गांधी शताब्दी नेत्र चिकित्सालय में आई कलेक्शन सेंटर की अनुमति दे दी है। इस सेंटर में नेत्र संकलन किया जाएगा। जबकि एम्स ऋषिकेश और हिमालयन हास्पिटल जौलीग्रांट के नेत्र बैंक में आईबॉल को निर्धारित समय अवधि के लिए सुरक्षित रखा जाएगा।
डॉ. नैथानी के अनुसार उत्तराखंड में 40 हजार लोग अंधता से ग्रसित हैं। जिसमें सबसे अधिक लोग मोतियाबिंद के शिकार हैं। जबकि कॉर्निया संबंधित अंधता का प्रतिशत 0.9 प्रतिशत है। वर्तमान में राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं के तहत पहली बार महात्मा गांधी शताब्दी नेत्र चिकित्सालय को आई कलेक्शन सेंटर की मंजूरी मिली है। जबकि राजकीय मेडिकल हल्द्वानी में नेत्र बैंक संचालित करने का कार्य चल रहा है।
उन्होंने बताया कि देश में प्रति वर्ष तीन से चार लाख लोगों को कॉर्निया प्रत्यारोपण किया जाना है लेकिन 50 हजार लोगों को प्रत्यारोपण हो पाता है। जागरूकता के अभाव में नेत्रदान नहीं होता है। जिससे कॉर्निया प्रत्यारोपण के मरीजों की संख्या 20 से 30 हजार प्रतिवर्ष बढ़ जाती है।