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उत्तराखंड: गुलदारों के हमलों से बेबस वन महकमा तैयार कर रहा बचाव की रणनीति

Thu, 29 Jul 2021 03:52 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यजू डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

उत्तराखंड प्रमुख वन संरक्षक (हौफ) राजीव भरतरी ने बताया कि वर्षाकाल में गुलदार के हमले अचानक बढ़ जाते हैं। जिससे मानव क्षति (घायल या मृत्यु) के मामले भी बढ़ जाते हैं। उन्होंने बताया कि बचाव के कुछ तरीकों को अपनाकर इन दुर्घटनाओं से बचा जा सकता है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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70 प्रतिशत से अधिक वन क्षेत्र वाले उत्तराखंड के पर्वतीय गांवों में पिछले कुछ सालों में गुलदार की दहशत बढ़ गई है। गुलदार घात लगाकर महिलाओं, बच्चों या पालतू पशुओं को अपना शिकार बना रहा है। गुलदार के बढ़ते हमलों के आगे न सिर्फ पहाड़ बल्कि पूरा वन महकमा बेबस नजर आ रहा है। गुलदार के हमले की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए अब वन विभाग सुरक्षा बनाने की रणनीति बनाने में जुट गया है। 

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उत्तराखंड प्रमुख वन संरक्षक (हौफ) राजीव भरतरी ने बताया कि वर्षाकाल में गुलदार के हमले अचानक बढ़ जाते हैं। जिससे मानव क्षति (घायल या मृत्यु) के मामले भी बढ़ जाते हैं। उन्होंने बताया कि बचाव के कुछ तरीकों को अपनाकर इन दुर्घटनाओं से बचा जा सकता है। इस संबंध में उनकी ओर से मुख्य वन संरक्षक प्रचार-प्रसार को निर्देशित किया गया है। इसके अलावा प्रभागीय वनाधिकारियों और निदेशकों से इस मामले में संवेदनशीलता बरतने व त्वरित कार्रवाई के लिए कहा गया है। 

विभागीय अधिकारियों को जारी किए निर्देश 
- प्रभागीय वनाधिकारी,  उप प्रभागीय वनाधिकारी घटना की परिस्थितियों को समझने का प्रयास करेंगे। भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए उपाय किए जाएं।
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- घटना के बाद नियमानुसार यथाशीघ्र अनुग्रह, राहत राशि के भुगतान की कार्रवाई की जाए। अधिक से अधिक 15 दिनों के भीतर भुगतान कर दिया जाए। 
- एसडीआरएफ की अग्रिम भुगतान की व्यवस्था न होने के मद्देनजर उनसे प्रतिपूर्ति के लिए प्रभागीय वनाधिकारी, निदेशक की ओर से अपर प्रमुख वन संरक्षक नियोजन एवं वित्तीय प्रबंधन के समक्ष मांग प्रस्तुत करें।
- जिन स्थानों पर गुलदार की सक्रियता दिखाई पड़े या आकस्मिक हमले घटित हों, वहां प्रभागीय वनाधिकारी, निदेशक की आरआरटी, क्यूआरटी की तैनाती की जाए। 
- प्रभागीय वनाधिकारी, उप प्रभागीय वनाधिकारी अपने स्तर से ग्रामीणों को वन्यजीवों से बचाव के तरीके अपनाने के लिए प्रेरित करें।
- प्रभागीय वनाधिकारी, निदेशक इस मद में उपलब्ध धनराशि की स्थिति से अवगत रहें। इसके अलावा संबंधित वन संरक्षक और अपर प्रमुख वन संरक्षक नियोजन एवं वित्तीय प्रबंधन को भी सूचित रखें।- दुर्घटना से पीड़ित परिवार को सांत्वना दिए जाने के लिए प्रभाग, संरक्षित क्षेत्र का कोई जिम्मेदार अधिकारी पीड़ित परिवार के पास जाए।

शूटर बढ़ाने से नहीं होगा समस्या का स्थायी समाधान 
उत्तराखंड प्रमुख वन संरक्षक (हौफ) राजीव भरतरी ने बताया कि गुलदारों को ऐसे ही खत्म नहीं किया जा सकता। इसलिए शूटर बढ़ाना समस्या को कोई स्थायी समाधान नहीं है। बल्कि इसके लिए लोगों को जागरूक किए जाने पर ज्यादा जोर दिया जा रहा है। संभावित वन्यजीवों के हमले वाले इलाकों में रहने वाले लोगों को अपने व्यवहार में बदलाव लाना होगा।

अकसर लोग कूड़ा, बचा हुआ खाना, पैक्ड फूड इत्यादि घर के आसपास फेंक देते हैं। इसे खाने के लिए बंदर, सूअर आते हैं। इनमें पीछे गुलदार आता है। घर के आसपास विशेषकर बरसात में झाड़ियों का कटान करें। रोशनी रखें। घरों में आवश्यक रूप से शौचालय बनवाएं। ऐसे कुछ उपाय हैं, जिन्हें अपना कर गुलदार को आबादी से दूर रखा जा सकता है।

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