रुद्रप्रयाग जिले में विश्वनाथ मंदिर गुप्तकाशी, कालीमठ, त्रियुगीनारायण, कार्तिक स्वामी, मां ललिता माई त्रिपुरा सुंदरी, वारही मंदिर, फलासी तुंगनाथ मंदिर, नारी मंदिर, कोटेश्वर, चौमुंडा मंदिर संगम, चंडिका मंदिर महड़, कार्तिक स्वामी सहित प्रमुख प्राचीन मठ-मंदिर है। इन मंदिरों में ज्यादातर केदारनाथ यात्रा मार्ग पर हैं।
ऐसे में शीतकाल में इन धार्मिक स्थलों का देश-विदेेश के भक्तजन दर्शन कर सकेंगे। बोर्ड की इस मुहिम से पहाड़ में बारामासी तीर्थाटन विकसित होने के साथ धार्मिक स्थलों तक जरूरी व्यवस्थाएं भी जुटाने में मदद मिलेगी और स्थानीय को रोजगार भी मिल सकेगा।
उत्तराखंड में बारामासी तीर्थाटन को विकसित करने की दिशा में कार्ययोजना तैयार की जा रही है। बोर्ड की आगामी बैठक में चारधाम शीतकालीन गद्दीस्थलों के साथ ही अन्य अधीनस्थ मंदिरों को बारामासी यात्रा से जोड़ने का प्रस्ताव रखा जाएगा। साथ ही पर्यटन एवं धर्मस्व संस्कृति मंत्री सतपाल महाराज से भी जल्द वार्ता कर आगे की रूपरेखा पर विचार-विमर्श किया जाएगा। अधीनस्थ मंदिरों में मूलभूत यात्री सुविधाओं को जुटाने के लिए भी कार्य किया जाएगा।
-श्रीनिवास पोस्ती, सदस्य उत्तराखंड चारधाम देवस्थान बोर्ड
2015 में शुरू की गई थी शीतकालीन यात्रा
रुद्रप्रयाग। 25 नवंबर 2015 में कांग्रेस सरकार ने शीतकालीन यात्रा की नींव रखी थी। 25 नवंबर को तत्कालीन शिक्षा मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी ने केदारनाथ व द्वितीय केदार मद्महेश्वर के शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ में शीतकालीन यात्रा का शुभारंभ किया था। नवंबर 2015 से अप्रैल 2016 तक ओंकारेश्वर मंदिर में लगभग 11 हजार श्रद्धालुओं ने दर्शन भी किए। लेकिन बाद के वर्षों में शासन व बीकेटीसी द्वारा इस दिशा में कोई प्रयास नहीं किया गया।