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उत्तराखंड के दौरे पर नीति आयोग उपाध्यक्ष: सीएम का अनुरोध, मिलता रहे जीएसटी का मुआवजा 

Sat, 09 Oct 2021 08:23 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

उत्तराखंड के तीन दिवसीय दौरे पर आए नीति आयोग के उपाध्यक्ष डॉ. राजीव कुमार के समक्ष मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य के विकास से जुड़े कई मुद्दों को उठाया। 
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नीति आयोग के उपाध्यक्ष डॉ. राजीव कुमार व मुख्यमंत्री धामी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नीति आयोग के उपाध्यक्ष डॉ. राजीव कुमार से अनुरोध किया कि सीमित संसाधनों वाले उत्तराखंड राज्य को जीएसटी की प्रतिपूर्ति (मुआवजा) बरकरार रखा जाए। जून 2022 में प्रतिपूर्ति की अवधि खत्म हो रही है। मुख्यमंत्री ने केंद्रीय योजनाओं के मानकों में फ्लोटिंग आबादी को शामिल करने की भी वकालत की। 

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उत्तराखंड के तीन दिवसीय दौरे पर आए नीति आयोग के उपाध्यक्ष डॉ. राजीव कुमार के समक्ष मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य के विकास से जुड़े कई मुद्दों को उठाया। शुक्रवार को सचिवालय में नीति आयोग के उपाध्यक्ष डॉ. राजीव कुमार के साथ बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि 9 नवंबर को उत्तराखंड राज्य स्थापना के 21 वर्ष पूरे होने जा रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने लक्ष्य दिया कि जब उत्तराखंड 25 वर्ष का होगा तो आदर्श विकसित राज्य हो।

केंद्र व राज्य सरकार मिलकर उत्तराखंड के तेजी से विकास के लिए काम कर रही हैं। सतत विकास और अंत्योदय सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। जब तक समाज में अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक विकास का लाभ नहीं पहुंचता है, तब तक हम चैन से नहीं बैठेंगे। लोगों को विकास योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ आसानी से मिले, इसके लिए सरलीकरण पर फोकस किया गया है। उद्योगों में सिंगल विंडो सहित तमाम प्रक्रियाओं को सरल किया गया है।
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बैठक में राज्य सरकार की ओर से नीति आयोग के समक्ष राज्य के विकास से संबंधित विभिन्न विषयों पर प्रस्तुतीकरण दिया गया। इस अवसर पर नीति आयोग की वरिष्ठ सलाहकार डॉ. नीलम पटेल, अनुराग गोयल, नीति आयोग उपाध्यक्ष के निजी सचिव रवींद्र प्रताप सिंह, सलाहकार अविनाश मिश्रा, डा. प्रेम सिंह, अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी, मनीषा पंवार, आनंद बर्द्धन, सचिव नियोजन डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम आदि मौजूद थे। 

सीमांत क्षेत्रों के विकास के लिए अधिक बजट मिले
मुख्यमंत्री ने नीति आयोग से सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास के लिए उत्तराखंड को अधिक धनराशि आवंटित करने की मांग रखी है। चीन और नेपाल की अंतरराष्ट्रीय सीमाएं जुड़ी होने से उत्तराखंड की सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थिति है। जिससे सीमांत क्षेत्रों के विकास के लिए राज्य को ज्यादा धन की आवश्यकता है। 

जीएसटी प्रतिपूर्ति बरकरार रखी जाए
अगले साल जून 2022 में जीएसटी प्रतिपूर्ति समाप्त हो रही है। इससे राज्य के लिए वित्तीय समस्या खड़ी हो जाएगी। जीएसटी प्रतिपूर्ति करने की व्यवस्था को आगे बढ़ाया जाए। मुख्यमंत्री ने राज्य के कुमाऊं क्षेत्र में एम्स की स्थापना करने के साथ ही लखवाड़ व्यासी परियोजना, जमरानी बहुद्देशीय परियोजना, सौंग बांध समेत अन्य प्रस्तावों को अंतिम मंजूरी दिलाने के लिए आयोग से सहयोग का आग्रह किया।

हर ब्लाक के एक गांव में हो नेचुरल फार्मिंग : डॉ. राजीव कुमार

नीति आयोग के उपाध्यक्ष डॉ. राजीव कुमार ने उत्तराखंड सरकार को सभी 95 विकासखंडों के एक-एक गांव में नेचुरल फार्मिंग का सुझाव दिया। उन्होंने कहा किसानों की आय बढ़ाने के लिए नेचुरल फार्मिंग एक बेहतर विकल्प है। उत्तराखंड दौरे पर आए डॉ. कुमार मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की मौजूदगी में शासन के उच्चाधिकारियों के साथ राज्य के विकास पर चर्चा कर रहे थे। उन्होंने आश्वस्त किया कि उत्तराखंड के विकास में आयोग एक पार्टनर की भूमिका निभा रहा है। राज्य सरकार को हरसंभव सहायता देने और विकास में मददगार बनने के लिए नीति आयोग तत्पर है। 

उन्होंने माना कि फॉरेस्ट क्लीयरेंस की प्रक्रिया को और सरल बनाने की जरूरत है। इस संबंध में राज्य सरकार के जो सुझाव हैं, उन्हें नीति आयोग को भेजा जाए। इस पर केंद्र से बात की जाएगी। उन्होंने राष्ट्रीय पार्कों में हाथियों और बाघों की संख्या में बढ़ोतरी को देखते हुए वहन क्षमता (केरिंग केपेसिटी) का आंकलन करने पर सहमति व्यक्त की है। शनिवार को सचिवालय स्थित वीरचंद्र सिंह गढ़वाली सभागार में राज्य के सुनियोजित विकास पर हुई बैठक में विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई। आयोग के उपाध्यक्ष ने कहा कि बैठक में उठाए गए मुद्दों पर राज्य सरकार के पक्ष पर आयोग केंद्र सरकार के मंत्रालयों से बात करेगा। राज्य के संबंधित अधिकारी भी इसका लगातार फॉलोअप करें। राज्य के विकास के लिए सेक्टर वार व समग्र प्लान बनाया जाए। 

उत्तराखंड में जिलावार सतत विकास लक्ष्य निर्धारित करने का सरकार का अच्छा कदम है। जिलों में विकास की प्रतिस्पर्धा को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। सतत विकास के महत्वपूर्ण संकेतकों पर विशेष ध्यान दिया जाए और इनकी लगातार मानीटरिंग जरूरी है। उन्होंने कहा कि जमीनी स्तर पर प्रक्रियाओं का सरलीकरण करने की आवश्यकता है। निवेशकों को विभिन्न विभागों से जो स्वीकृति या अनुमति लेनी होती हैं, उनका जहां तक संभव हो सरलीकरण किया जाए। 

नेचुरल फार्मिंग पर फोकस किया जाए
आर्गेनिक फार्मिंग के साथ ही नेचुरल फार्मिंग पर भी विशेष ध्यान दिया जाए। इससे किसानों की आय को दोगुनी करने में मदद मिल सकती है। उन्होंने प्रत्येक ब्लॉक में एक गांव को प्राकृतिक कृषि के लिए समर्पित करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में स्कूली शिक्षा की बेहतर स्थिति है। लेकिन उच्च शिक्षा के लिए बेहतर शिक्षण संस्थाएं कम हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि छात्रों को बेहतर उच्च शिक्षा राज्य में ही प्राप्त हो सके, इस ओर भी ध्यान दिया जाए। उन्होंने कहा कि नदियों के पुनर्जीवन पर भी काफी काम किया जा सकता है। इसमें नीति आयोग नमामि गंगे से राज्य को सहायता को दिलाने के लिए प्रयास करेगा।

स्थानीय संसाधनों के उपयोग पर जोर
कहा कि पर्यटन में अधिक से अधिक स्थानीय संसाधनों का उपयोग किया जाए। स्थानीय लोगों को अधिक से अधिक जोड़ने के लिए सुनियोजित योजना की जरूरत है। डॉ. कुमार ने कहा कि कृषि में उच्च कीमत देने वाली औषधीय खेती, मसाले, फूलों की खेती को बढ़ावा देना होगा। उन्होंने उद्योग को लॉजिस्टिक सुविधा के लिए इनलैंड कंटेनर डिपो की स्थापना के लिए निजी क्षेत्र का सहयोग लेने का सुझाव दिया। आयोग के उपाध्यक्ष ने कहा कि फॉरेस्ट क्लीयरेंस की प्रक्रिया को सरल करने की जरूरत है। राज्य सरकार की ओर से जो भी सुझाव हैं, उन्हें नीति आयोग को भेजा जाए। केंद्र सरकार से सरलीकरण की बात की जाएगी।
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नीति आयोग उपाध्यक्ष के समक्ष मुख्यमंत्री धामी ने उठाए कई मुद्दे

करीब 70 फीसदी वन क्षेत्र वाले उत्तराखंड में विकास योजनाओं के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी वन एवं पर्यावरणीय स्वीकृति का मसला शनिवार को नीति आयोग के उपाध्यक्ष डॉ. राजीव कुमार के सामने प्रमुखता से उठा। अपर मुख्य सचिव (वन) आनंद बर्द्धन ने राज्य की विकास योजनाओं को रफ्तार देने के लिए पांच हेक्टेयर तक वन भूमि हस्तांतरण का अधिकार राज्य को देने की जोरदार वकालत की। उन्होंने वन, पर्यावरण और कैंपा से जुड़े मसलों को नीति आयोग के उपाध्यक्ष के सामने रखा और केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से इनके समाधान के लिए उनसे सहयोग की अपील की।

सचिवालय स्थित वीर चंद्र सिंह गढ़वाली सभागार में हुई बैठक में  वन स्वीकृतियों की प्रक्रिया को सरल किए जाने की मांग की गई। इस संबंध में राज्य के अधिकारियों ने पांच हेक्टेयर तक वन भूमि हस्तांतरण का अधिकार राज्य को दिए जाने की वकालत की, ताकि राज्य सरकार जरूरत के हिसाब से वन भूमि का इस्तेमाल कर सके।  बैठक में अधिकारियों ने बताया कि वर्ष 2013 की आपदा के बाद केंद्र सरकार ने यह अधिकार एक निश्चित अवधि के लिए राज्य को दिया था, लेकिन आपदा की दृष्टि से संवेदनशील उत्तराखंड राज्य में इस अधिकार के तहत शिथिलता प्रदान की जानी चाहिए। इस संबंध में नीति आयोग के उपाध्यक्ष डॉ. राजीव कुमार ने कहा कि राज्य सरकार के जो भी सुझाव हैं, नीति आयोग को भेजे। इन पर विचार किया जाएगा। बैठक में अपर प्रमुख वन संरक्षक नियोजन एवं वित्तीय प्रबंधन जीएस पांडे आदि मौजूद थे।

इस संबंध में अधिकारियों ने बताया कि राज्य के विकास से संबंधित तमाम निर्माण कार्य वन स्वीकृतियों की प्रक्रिया में अटके रहते हैं। इसके कारण कई बार निर्माण की लागत बढ़ जाती है। इससे अकसर सड़कों के निर्माण, नहरों के निर्माण और तमाम परियोजनाओं को पूरा करने में दिक्कत आती है। उन्होंने नेशनल पार्कों में हाथियों और टाइगर की संख्या में बढ़ोतरी को देखते हुए इनकी केयरिंग कै पेसिटी का आकलन किए जाने पर भी सहमति व्यक्त की।

वन संबंधी यह मुद्दे भी उठे
1- परिवेश पोर्टल पर वन भूमि स्थानांतरण प्रक्रिया का सरलीकरण किया जाना
2- गैर-वानिकी के लिए निजी वन भूमि परिवर्तन में एफसीए शर्तों में छूट का प्रावधान दिए जाने
3- राज्य परियोजनाओं के लिए दोगुने क्षेत्र में वनीकरण की शर्त में छूट
4- पांच हेक्टेयर तक वन भूमि हस्तांतरण का अधिकार राज्य को दिए जाने, ताकि राज्य सरकार जरूरत के हिसाब से वन भूमि का इस्तेमाल कर सके
5- राज्य कैम्पा फंड में केंद्र की हिस्सेदारी 10 प्रतिशत से 2 करने करने पर पुनर्विचार करने
6- राष्ट्रीय स्तर पर कैम्पा के उच्चतम प्राधिकरण में राज्य सरकार का प्रतिनिधित्व
7- आपदा के कारण लोगों का विस्थापन कैम्पा मद से किए जाने की अनुमति देने
8- केंद्र में फंसे भूमि स्थानांतरण के मुद्दों में भी शिथिलता की मांग
9- बाघों और हाथियों के लिए राष्ट्रीय उद्यानों की वहन क्षमता निर्धारित करने के लिए अध्ययन का अनुरोध
10- दून घाटी अधिसूचना को वापस लेना
11-  बूचड़खानों को लाल श्रेणी के उद्योग से गैर-उद्योग में स्थानांतरित किया जाना
12- उत्तराखंड को ग्रीन बोनस दिए जाने

फॉरेस्ट क्लीयरेंस के सरलीकरण पर होगी बात
आयोग के उपाध्यक्ष ने कहा कि फॉरेस्ट क्लीयरेंस की प्रक्रिया को सरल करने की जरूरत है। राज्य सरकार की ओर से जो भी सुझाव हैं, उन्हें नीति आयोग को भेजा जाए। केंद्र सरकार से सरलीकरण की बात की जाएगी। आर्गेनिक फार्मिंग के साथ ही नेचुरल फार्मिंग पर भी विशेष ध्यान दिया जाए। इससे किसानों की आय को दोगुनी करने में मदद मिल सकती है। उन्होंने प्रत्येक ब्लॉक में एक गांव को प्राकृतिक कृषि के लिए समर्पित करने का सुझाव दिया।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में स्कूली शिक्षा की बेहतर स्थिति है। लेकिन उच्च शिक्षा के लिए बेहतर शिक्षण संस्थाएं कम हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि छात्रों को बेहतर उच्च शिक्षा राज्य में ही प्राप्त हो सके, इस ओर भी ध्यान दिया जाए। उन्होंने कहा कि नदियों के पुनर्जीवन पर भी काफी काम किया जा सकता है। इसमें नीति आयोग नमामि गंगे से राज्य को सहायता को दिलाने के लिए प्रयास करेगा। कहा कि पर्यटन में अधिक से अधिक स्थानीय संसाधनों का उपयोग किया जाए। स्थानीय लोगों को अधिक से अधिक जोड़ने के लिए सुनियोजित योजना की जरूरत है। उच्च कीमत देने वाली खेती को बढ़ावा देने के लिए डॉ. कुमार ने कहा कि कृषि में उच्च कीमत देने वाली औषधीय खेती, मसाले, फूलों की खेती को बढ़ावा देना होगा। उन्होंने उद्योग को लॉजिस्टिक सुविधा के लिए इनलैंड कंटेनर डिपो की स्थापना के लिए निजी क्षेत्र का सहयोग लेने का सुझाव दिया।
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