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उत्तराखंड: रोडवेज और प्राइवेट बसों, टैक्सी, विक्रम की किराया बढ़ोतरी टली, उच्च स्तरीय कमेटी गठित

Sat, 23 Oct 2021 08:14 PM IST
अलका त्यागी अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून

सार

पर्वतीय मार्गों पर बस या अन्य वाहन संचालित करने वालों से इस बारे में कोई सुझाव नहीं लिया गया है। सभी आपत्तियों को ध्यान में रखते हुए एसटीए ने एक उच्च स्तरीय समिति का गठन कर दिया है।
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रोडवेज - फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
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उत्तराखंड में रोडवेज बसों के साथ ही निजी बस, टैक्सी, मैक्सी, विक्रम, ऑटो, सिटी बस, ट्रकों की किराया बढ़ोतरी फिलहाल टल गई है। राज्य परिवहन प्राधिकरण ने आपत्तियों के बाद किराया निर्धारण के लिए उच्च स्तरीय समिति गठित की है, जो प्रदेशभर से आने वाले सुझावों के आधार पर किराया निर्धारित करने का प्रस्ताव तैयार करेगी।

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शनिवार को परिवहन मुख्यालय में परिवहन आयुक्त दीपेंद्र कुमार चौधरी की अध्यक्षता में राज्य परिवहन प्राधिकरण (एसटीए) की बैठक हुई। बैठक में सबसे प्रमुख मुद्दा वाहनों का किराया व भाड़ा बढ़ोतरी का रहा। आरटीओ देहरादून की अध्यक्षता में गठित समिति की रिपोर्ट के आधार पर जो बढ़ोतरी के प्रस्ताव एसटीए बैठक में रखे गए, उस पर ट्रांसपोर्ट कारोबारियों ने आपत्ति जता दी। एक ओर जहां सिटी बस यूनियन ने दूरी का स्लैब बदलने पर आपत्ति जताई तो दूसरी ओर ट्रक संचालकों ने किराए की एक ही श्रेणी रखने पर एतराज जताया। 

बैठक में विकासनगर रूट के बस संचालकों की अपील पर हाईकोर्ट के निर्देशों के तहत भी विचार किया गया। क्योंकि समिति ने जो बढ़ोतरी का प्रस्ताव दिया था, उसमें हाईकोर्ट के यह निर्देश शामिल नहीं थे। बैठक में ऑटो चालकों ने भी दो किलोमीटर तक की श्रेणी में किराया बढ़ोतरी न करने पर आपत्ति जताई। एक आपत्ति यह भी आई कि समिति ने जो रिपोर्ट तैयार की है वह केवल देहरादून, ऋषिकेश जैसी सीमित जगहों से आए फीडबैक के आधार पर तैयार हुई है। 
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पर्वतीय मार्गों पर बस या अन्य वाहन संचालित करने वालों से इस बारे में कोई सुझाव नहीं लिया गया है। सभी आपत्तियों को ध्यान में रखते हुए एसटीए ने एक उच्च स्तरीय समिति का गठन कर दिया है। यह समिति आरटीओ प्रशासन देहरादून की अध्यक्षता में ही काम करेगी। इसमें लोक निर्माण विभाग के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर मैकेनिकल के साथ ही आरटीओ प्रवर्तन हल्द्वानी, आरटीओ प्रशासन अल्मोड़ा और आरटीओ प्रवर्तन पौड़ी बतौर सदस्य शामिल होंगे। यह समिति परिवहन मुख्यालय के निर्देशों के तहत निर्धारित समयावधि में प्रदेशभर से परिवहन व्यवसायियों का फीडबैक लेने के बाद किराया बढ़ोतरी का प्रस्ताव तैयार करके भेजेगी। इसके बाद ही किराए पर फैसला लिया जाएगा।

...तो सरकार ने डाला ठंडे बस्ते में
एसटीए बैठक के बाद अधिकारियों ने भले ही स्पष्ट किया हो कि किराया बढ़ोतरी के प्रस्ताव पर आई आपत्तियों के चलते दोबारा निर्धारण की प्रक्रिया होगी, लेकिन माना यह जा रहा है कि सरकार भी चुनावी साल में यह जोखिम लेना नहीं चाहती है। किराये में बढ़ोतरी होने पर चुनावी माहौल पर इसका असर पड़ने की आशंका के चलते ही सरकार ने फिलहाल इसे ठंडे बस्ते में डाला है। हालांकि, परिवहन आयुक्त दीपेंद्र कुमार चौधरी का कहना है कि आपत्तियों की वजह से दोबारा समिति बनाई गई है जो कि निर्धारित समयावधि में अपनी रिपोर्ट देगी। 

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