अनीता नेगी ने बताया, उनके चार कमरों में दरारें इतनी चौड़ी हो गई कि कमरे की दीवार के बाहर आरपार दिखाई दे रहा है। जहां ड्रिलिंग हो रही है उसके पास ही यह मकान है। ऐसे में दीवार के कभी भी गिरने का खतरा बना हुआ है। उन्होंने प्रशासन से शीघ्र विस्थापन की मांग उठाई। वहीं, सिंचाई विभाग के ईई अरविंद नेगी ने बताया, सड़क पर ड्रिलिंग के दौरान पानी का रिसाव शुरू हो गया है।
आशंका है कि यह सीवर का पानी होगा। इसकी जांच करवाई जा रही है। आईआईटी रुड़की के वैज्ञानिकों के दिशा निर्देशन में भू-धंसाव का ट्रीटमेंट किया जा रहा है। भू-धंसाव वाले एरिया में पानी की निकासी को रोकने के लिए भूमि के अंदर कुछ उपचार किया जाएगा। साथ ही माइक्रो पाइलिंग भी की जाएगी, जिससे मिट्टी की पकड़ बनी रहे।
हल्दापानी भू-धंसाव क्षेत्र में 80 करोड़ की लागत से ट्रीटमेंट कार्य किया जा रहा है। आवासीय मकानों की सुरक्षा के उपाय किए जा रहे हैं। कुछ प्रभावितों को भवनों को छोड़ने के लिए नोटिस भी दिए गए हैं।
-नंदकिशोर जोशी, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी, चमोली।