फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

चमोली में बड़ा संकट: आर-पार दिखने लगीं हल्दापानी के मकानों की दरारें, हाईवे पर ड्रिलिंग के दौरान आया पानी

Thu, 29 Feb 2024 08:39 PM IST
अलका त्यागी संवाद न्यूज एजेंसी, गोपेश्वर (चमोली)

सार

Chamoli News: हल्दापानी में करीब 80 मकान हैं, जिसमें से 20 मकानों में दरारें आ चुकी हैं। अब ड्रिलिंग के बाद से 10 से 12 मकानों में दरारें बढ़ गई हैं।
विज्ञापन
हल्दापानी में मकानों की दरारें हुईं आर पार - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

हल्दापानी भूस्खलन क्षेत्र में चल रहा ट्रीटमेंट कार्य लोगों के लिए मुसीबत बनता जा रहा है। हल्दापानी में अब तक 20 मकानों में दरारें आ चुकी हैं, लेकिन भूस्खलन ट्रीटमेंट के काम से अब यहां करीब 12 मकानों की दरारें बढ़ गई हैं। स्थिति यह है कि एक मकान के दीवारों की दरारें इतनी चौड़ी हो गई कि आरपार दिखाई देने लगा है।

विज्ञापन


वहीं, अब प्रभावित क्षेत्र में चमोली-मंडल-ऊखीमठ हाईवे पर ड्रिलिंग के दौरान जमीन से पानी आने से काम रोक दिया गया है। लोगों ने क्षेत्र में ड्रेनेज सिस्टम दुरुस्त करने के बाद ही भू-धंसाव के ट्रीटमेंट का कार्य करने की मांग की है। बुधवार को चमोली-मंडल-ऊखीमठ हाईवे के किनारे करीब आठ मीटर तक भूमि के अंदर ड्रिलिंग की गई, लेकिन यहां जमीन से पानी का रिसाव शुरू हो गया।

सिंचाई विभाग ने अब यहां मशीन से ड्रिलिंग का काम रोक दिया। बृहस्पतिवार को भी यहां ड्रिलिंग नहीं हुई, जबकि भूस्खलन क्षेत्र में सेल्फ ड्रिलिंग का काम जारी है। वहीं, हल्दापानी में करीब 80 मकान हैं, जिसमें से 20 मकानों में दरारें आ चुकी हैं। अब ड्रिलिंग के बाद से 10 से 12 मकानों में दरारें बढ़ गई हैं। प्रभावित क्षेत्र में दरारों वाले मकानों में लोग रहने में भी डर रहे हैं।

Uttarakhand Budget Session 2024: ध्वनिमत से बजट पास, सत्र की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित

विज्ञापन
विज्ञापन

अनीता नेगी ने बताया, उनके चार कमरों में दरारें इतनी चौड़ी हो गई कि कमरे की दीवार के बाहर आरपार दिखाई दे रहा है। जहां ड्रिलिंग हो रही है उसके पास ही यह मकान है। ऐसे में दीवार के कभी भी गिरने का खतरा बना हुआ है। उन्होंने प्रशासन से शीघ्र विस्थापन की मांग उठाई। वहीं, सिंचाई विभाग के ईई अरविंद नेगी ने बताया, सड़क पर ड्रिलिंग के दौरान पानी का रिसाव शुरू हो गया है।

आशंका है कि यह सीवर का पानी होगा। इसकी जांच करवाई जा रही है। आईआईटी रुड़की के वैज्ञानिकों के दिशा निर्देशन में भू-धंसाव का ट्रीटमेंट किया जा रहा है। भू-धंसाव वाले एरिया में पानी की निकासी को रोकने के लिए भूमि के अंदर कुछ उपचार किया जाएगा। साथ ही माइक्रो पाइलिंग भी की जाएगी, जिससे मिट्टी की पकड़ बनी रहे।

हल्दापानी भू-धंसाव क्षेत्र में 80 करोड़ की लागत से ट्रीटमेंट कार्य किया जा रहा है। आवासीय मकानों की सुरक्षा के उपाय किए जा रहे हैं। कुछ प्रभावितों को भवनों को छोड़ने के लिए नोटिस भी दिए गए हैं।
-नंदकिशोर जोशी, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी, चमोली।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें