महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्य ने पूर्व सीएम हरीश रावत पर पलटवार करते हुए कहा कि हरीश रावत इंसानों को बल्द और बकरी जैसे शब्दों से संबोधित कर रहे हैं। इससे उनकी दुर्बल मानसिकता जगजाहिर हो रही है। उन्होंने कहा कि टेक होम राशन योजना में केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों का पालन किया जा रहा है। योजना पर कुल खर्च का 90 फीसदी अंश केंद्र सरकार एवं 10 फीसदी राज्य सरकार वहन करती है।
मंत्री रेखा आर्य ने कहा कि प्रदेश में इस योजना से नौ लाख बच्चे, गर्भवती एवं धात्री महिलाएं लाभान्वित हो रही हैं। स्वयं सहायता समूहों के रोजगार को लेकर जो भ्रांति फैलाई जा रही है। इस संबंध में विभाग की ओर से स्पष्ट कर दिया गया है कि पूरे प्रदेश में इस योजना में 154 समूह कार्यरत हैं। राज्य के छह जिलों में एक भी समूह इस योजना में काम नहीं कर रहा। विभागीय मंत्री ने कहा कि योजना बच्चों और महिलाओं के पोषण से जुड़ी है। पोषणपूरक योजना को रोजगारपरक बना दिया गया था, उसी व्यवस्था के तहत 154 समूहों के बजाय सरकार अब उससे कई गुना अधिक समूहों को रोजगार प्रदान करने जा रही है।
विभागीय मंत्री ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत को अपने आप को राजनीतिक रूप से जीवित रखने के लिए कुछ न कुछ कहना ही है। दुर्भाग्य यह है कि इतने वरिष्ठ होने के बाद आज वह मुख्यमंत्री की कुर्सी पाने की लालसा में ऐसी शब्दावली का प्रयोग करने लगे हैं जो गैर जिम्मेदाराना व कुंठित मानसिकता को दर्शाता है। उनकी इन्हीं आदतों के कारण आज उन्होंने खुद को इतना हल्का कर दिया है कि उनकी ही पार्टी उनको गंभीरता से नहीं लेती। हरीश रावत अपनी वाणी में संयम रखें।