इधर, पार्टी सूत्रों का कहना है बागियों की वापसी की राह आसान हो सकती है, बशर्ते वह माफी के साथ हरीश रावत को अपना नेता मान लें। जबकि दूसरे गुट के मिजाज इससे इतर हैं। उनका कहना है कि पार्टी में कौन आएगा, कौन नहीं आएगा, यह अधिकार पार्टी हाईकमान के अलावा किसी को नहीं है। जो व्यक्ति कांग्रेस में आस्था जताते हुए वापसी करना चाहता है, यदि वह पार्टी हित में होगा तो उसकी जरूर वापसी होगी।
कांग्रेस में यदि राजनीतिक रूप से रिवर्स पलायन की स्थिति आ रही है तो इसका श्रेय हमारे उन नेतागणों और कार्यकर्ता साथियों को जाता है, जिन्होंने साढ़े चार साल के निरंतर संघर्ष के बाद श्री गणेशाय नम: किया है। अब कांग्रेस इस स्थिति में आई है कि लोग कांग्रेस में शामिल होने की बात कर रहे हैं। कार्यकर्ता साथियों को थोड़ा और जोर लगाना होगा। हम सत्ता से केवल एक कदम दूर हैं।
- हरीश रावत, पूर्व सीएम, उत्तराखंड
कांग्रेस पार्टी के दरवाजे सभी के लिए खुले हैं। कौन आएगा और कौन नहीं, यह तय करने का अधिकार पार्टी हाईकमान सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को है। शीर्ष नेतृत्व इस परिप्रेक्ष्य में जो भी निर्णय लेगा वह मुझे मंजूर होगा।
- प्रीतम सिंह, नेता प्रतिपक्ष