क्या कहा है मंत्रालय ने
मंत्रालय ने कहा है कि संविधान में राज्य बिजली उत्पादन पर किसी भी तरह का कर लगाने का कोई प्रावधान नहीं है। बिजली उत्पादन पर चूंकि दो ही उपकर लग रहे हैं। एक उपभोक्ताओं से वसूला जाने वाला जल उपकर और दूसरा परियोजनाओं से वसूला जाने वाला पीडीएफ। लिहाजा, मंत्रालय ने दोनों को ही असांविधानिक माना है।
बिजली उत्पादन पर जल उपकर रद्द करने के संबंध में ऊर्जा मंत्रालय के पत्र की जानकारी है। जल्द मुख्य सचिव की अध्यक्षता में बैठक होगी, जिसमें ऊर्जा, वित्त, सिंचाई, यूपीसीएल व बिजली उत्पादन से जुड़ीं सार्वजनिक उपक्रम के प्रतिनिधियों को बुलाया जाएगा। बैठक में मंत्रालय के पत्र पर चर्चा होगी और आगे की रणनीति तय होगी। मैं व्यक्तिगत रूप से बिजली उत्पादन पर जल उपकर लगाए जाने के पक्ष में नहीं हूं।
- डॉ. आर मीनाक्षी सुंदरम, सचिव, ऊर्जा
बिजली उत्पादन पर जल उपकर के संबंध में उत्तराखंड सरकार ने बाकायदा अधिनियम बनाया है। कुछ लोग इस अधिनियम के विरोध में न्यायालय में गए हैं। सिंचाई विभाग कोर्ट में लड़ाई लड़ रहा है। उत्तराखंड के आर्थिक संसाधन सीमित हैं। सरकार अपने संसाधनों में बढ़ाने के लिए जिन क्षेत्रों में फोकस कर रही है, उसमें एक जल उपकर भी है। इससे हमें सालाना 500 करोड़ आय का अनुमान है।
- आनंद बर्द्धन, अपर मुख्य सचिव, वित्त